उज्जैन की शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया और सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, मुस्लिम पक्ष के वकील अरशद वारसी के मुताबिक अदालत के सामने यह बात रखी गई कि शाही जामा मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा हटाया जाना है। इस तरह अब कार्रवाई को लेकर स्थिति पहले के मुकाबले स्पष्ट होती नजर आ रही है।
नगर निगम और कमेटी के बीच पहले ही हुआ समझौता
मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि उज्जैन नगर निगम और धार्मिक स्थल कमेटी के बीच पहले ही समझौता हो चुका है। वकील के मुताबिक, इसी सहमति के तहत शाही जामा मस्जिद का जितना हिस्सा हटाया जाएगा, उसके बदले एफएआर और टीडीआर दिए जाने की बात तय हुई है। अदालत में भी इसी व्यवस्था से जुड़ी शर्तों को लेकर पक्ष रखा गया। यानी विवाद का समाधान आपसी सहमति और अदालत में तय शर्तों के आधार पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम
दरअसल, उज्जैन में आने वाले सिंहस्थ मेले को देखते हुए मास्टर प्लान के तहत सड़कों को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत सड़क के विस्तार में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम कर रहा है। शाही जामा मस्जिद का हिस्सा भी इसी कार्रवाई के दायरे में आया, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। इससे पहले 9 सितंबर को दाखिल की गई याचिका को मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए खारिज किया गया था।
तीन फीट हिस्से को लेकर हुई सुनवाई
पहले फैसले के बाद एडवोकेट अशहर वारसी की ओर से रिट अपील दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की तरफ से कहा गया कि शाही जामा मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा हटाया जाए और नगर निगम की ओर से एफएआर व टीडीआर से जुड़े पुराने आश्वासनों का पूरा पालन सुनिश्चित किया जाए। सुनवाई के दौरान नई कमेटी की ओर से भी एक याचिका लाई गई थी, लेकिन प्रशासन से बातचीत के बाद उसे वापस ले लिया गया।
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