दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने दावा किया है कि उन्हें चुनाव आयोग की ओर से एक ऐसा नोटिस भेजे जाने की जानकारी मिली है, जिसे लेकर वह खुद सवालों के घेरे में प्रक्रिया को खड़ा कर रहे हैं। सिब्बल के मुताबिक, उनके पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी पहले से मौजूद है और उनके दस्तावेजों की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की ओर से उनके फॉर्म और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाने की बात भी उन्होंने कही। इसके बावजूद उन्हें ‘Unmapped with Last SIR’ श्रेणी में नोटिस दिया गया है। सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब पुराने रिकॉर्ड से उनका मिलान हो चुका है और उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में भी है, तब आखिर इस नोटिस की जरूरत क्यों पड़ी?
फोन से मिली जानकारी, घर नहीं पहुंचा नोटिस
कपिल सिब्बल ने बताया कि उन्हें इस नोटिस की जानकारी सीधे चुनाव आयोग की ओर से किसी कागजी नोटिस के जरिए नहीं मिली। उनका कहना है कि उन्हें फोन के माध्यम से इसके बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर संबंधित जानकारी देखी और अपने कार्यालय से भी नोटिस के बारे में पता कराया। सिब्बल के अनुसार, उनके पास नोटिस की कोई भौतिक प्रति नहीं पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मोबाइल नंबर चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब उनसे संपर्क करने की जानकारी उपलब्ध थी, तब नोटिस के संबंध में उन्हें सीधे जानकारी क्यों नहीं दी गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट जाने के सवाल पर सिब्बल का साफ जवाब
मामले को लेकर जब कपिल सिब्बल से पूछा गया कि क्या वह चुनाव आयोग के नोटिस को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे, तो उन्होंने इससे इनकार किया। सिब्बल ने कहा कि जब उनके रिकॉर्ड का मिलान हो चुका है, तो वह अपने नाम या वोट को बचाने के लिए अदालत में आवेदन लेकर क्यों जाएं। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मामले को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका कहना है कि वह SIR से जुड़े और आंकड़े जुटाएंगे और उन्हें सार्वजनिक करेंगे। सिब्बल के मुताबिक, इसके जरिए वह लोगों के सामने यह रखना चाहते हैं कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में किस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने इस पूरी कवायद को आने वाले चुनावों की तैयारी से जोड़कर भी सवाल उठाए हैं।
‘मेरे साथ ऐसा हो सकता है तो आम मतदाता का क्या होगा?’
कपिल सिब्बल ने अपने मामले का हवाला देते हुए आम मतदाताओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि जब उनके पास पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं और BLO की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद उन्हें नोटिस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसे मतदाताओं की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है जिनके पास पुराने दस्तावेज या रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि शायद चुनाव आयोग यह दिखाना चाहता है कि SIR की प्रक्रिया में किसी खास व्यक्ति को अलग से छूट नहीं दी जा रही है। हालांकि, SIR में नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं माना जाता। संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। दिल्ली की SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी है।
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