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एक पैर गंवाने के बाद भी नहीं छोड़ी पढ़ाई, रागिनी की जिद देख DM ने खुद उठाया ये कदम

बलिया की दिव्यांग रागिनी एक पैर के सहारे 400 मीटर दूर स्कूल जाती थी। उसकी अपील पर DM खुद घर पहुंचे और ट्राईसाइकिल समेत पढ़ाई की सामग्री भेंट की।

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हिम्मत और पढ़ाई के प्रति जुनून की मिसाल बन गई है। मानियर विकासखंड के रानीपुर दिघेड़ा गांव की रहने वाली रागिनी बचपन में हुए एक हादसे के कारण अपना एक पैर गंवा चुकी है। इसके बावजूद पढ़ने की उसकी इच्छा कभी कम नहीं हुई। रागिनी कक्षा एक में पढ़ती है और रोजाना घर से करीब 400 मीटर दूर स्कूल तक एक पैर के सहारे पहुंचती थी। यह रास्ता उसके लिए काफी मुश्किल भरा था। कई बार थकान के कारण वह रास्ते में गिर जाती और रोने लगती थी। इसके बावजूद उसने स्कूल जाना नहीं छोड़ा।

सात महीने की उम्र में हुआ था दर्दनाक हादसा

रागिनी जब सिर्फ सात महीने की थी, तभी वह एक गंभीर सड़क दुर्घटना की चपेट में आ गई थी। हादसे में उसका एक पैर बुरी तरह घायल हो गया था और बाद में उसे चलने लायक नहीं बचाया जा सका। समय के साथ रागिनी बड़ी हुई तो उसके अंदर पढ़ाई करने की इच्छा भी मजबूत होती गई। परिवार के मुताबिक, जब वह अपने आसपास के बच्चों को स्कूल जाते देखती थी तो खुद भी पढ़ने के लिए जिद करती थी। माता-पिता ने उसकी इच्छा को समझते हुए उसका दाखिला स्कूल में कराया। स्कूल जाने के दौरान होने वाली परेशानी के बावजूद रागिनी ने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार पढ़ाई जारी रखी।

रागिनी की अपील सुनकर खुद घर पहुंचे DM

रागिनी की परेशानी और उसकी स्कूल जाने की जिद की जानकारी जब जिला प्रशासन तक पहुंची तो उसकी मदद के लिए कदम उठाया गया। बच्ची ने जिलाधिकारी से ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की अपील की थी, ताकि वह बिना परेशानी स्कूल आ-जा सके। उसकी बात ने जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को प्रभावित किया। इसके बाद डीएम खुद रागिनी से मिलने उसके गांव स्थित घर पहुंच गए। उन्होंने बच्ची को ट्राईसाइकिल भेंट की। इसके साथ ही पढ़ाई और खेलकूद से जुड़ी सामग्री भी दी गई। प्रशासन की इस पहल से रागिनी और उसके परिवार के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई।

डॉक्टर बनने का सपना, रास्ते की भी होगी मरम्मत

ट्राईसाइकिल मिलने के बाद रागिनी काफी खुश हुई। उसने बताया कि उसने ‘डीएम अंकल’ से साइकिल मांगी थी और अब उसे साइकिल के साथ मिठाई भी मिली है। जिलाधिकारी ने बताया कि रागिनी की अपील बेहद भावुक करने वाली थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन आगे भी जरूरत के मुताबिक बच्ची और उसके परिवार की मदद करेगा। रागिनी का मेडिकल चेकअप भी कराया गया है। बच्ची पढ़ाई करके भविष्य में डॉक्टर बनना चाहती है। डीएम ने उसके सपने के लिए शुभकामनाएं देते हुए गांव से स्कूल तक जाने वाले रास्ते की मरम्मत कराने की बात भी कही है। ट्राईसाइकिल मिलने से अब रागिनी के लिए स्कूल तक पहुंचना पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकेगा।

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