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रसोई गैस को लेकर चौंकाने वाला खुलासा! LPG की खपत अचानक घटी, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी, जानें वजह

अगस्त 2026 में भारत में LPG खपत 16.15% घटी, जबकि पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी। जानें LPG खपत में गिरावट की वजह और ताजा आंकड़ों का पूरा असर।

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LPG Cylinder: देश में रसोई गैस यानी LPG की खपत को लेकर अगस्त 2026 के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत में LPG की खपत घटकर करीब 2.42 मिलियन टन रह गई। पिछले साल अगस्त 2025 में यह आंकड़ा करीब 2.89 मिलियन टन था। इस तरह एक साल में LPG खपत में लगभग 16.15 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि यह गिरावट केवल एक महीने तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से LPG की खपत में कमी देखने को मिल रही है। इससे घरेलू गैस की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अप्रैल से अगस्त तक भी लगातार गिरावट

आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भी LPG की खपत में बड़ी कमी दर्ज हुई है। इन पांच महीनों में देश में कुल LPG खपत करीब 11.29 मिलियन टन रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 13.42 मिलियन टन थी। यानी इस दौरान खपत करीब 15.89 फीसदी कम हुई है। जानकारों के मुताबिक, LPG की खपत में लगातार गिरावट को केवल लोगों की कम मांग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे गैस की सप्लाई, आयात और उपलब्ध मात्रा से जुड़ी कई चुनौतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

वेस्ट एशिया संकट और सप्लाई पर दबाव

भारत अपनी LPG जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वेस्ट एशिया में पैदा हुए तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी सप्लाई चुनौतियों का असर LPG की उपलब्धता पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई प्रभावित होने से भारत में भी LPG की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा। इसका असर घरेलू बाजार में गैस की खपत पर दिखाई दिया। इसके अलावा सरकार की ओर से शहरों में PNG कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे कुछ उपभोक्ताओं के LPG इस्तेमाल में बदलाव आया है। हालांकि मौजूदा गिरावट के पीछे सप्लाई संबंधी दिक्कतों को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

LPG कम, लेकिन पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी

LPG के आंकड़ों के उलट पेट्रोल और डीजल की खपत में तेजी देखने को मिली है। अगस्त 2026 में देश में पेट्रोल की खपत करीब 3.82 मिलियन टन रही, जो अगस्त 2025 के 3.54 मिलियन टन से 7.88 फीसदी अधिक है। वहीं डीजल की खपत 6.46 फीसदी बढ़कर करीब 7 मिलियन टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 6.58 मिलियन टन थी। यानी एक तरफ रसोई गैस की खपत घट रही है, वहीं वाहनों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ रही है। इन आंकड़ों से देश के ईंधन बाजार में बदलते पैटर्न की तस्वीर साफ होती है।

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