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उर्वशी रौतेला की तिरंगे वाली ड्रेस पर मचा हंगामा, जानें क्या कहता है भारत का कानून

उर्वशी रौतेला की तिरंगे से प्रेरित ड्रेस पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है। जानें भारत में राष्ट्रीय ध्वज के कपड़ों में इस्तेमाल और तिरंगे के सम्मान को लेकर क्या नियम हैं।

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जयपुर में आयोजित मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 कार्यक्रम में उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) जज के तौर पर शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने ऐसा गाउन पहना, जिसमें तिरंगे के तीनों रंगों की झलक दिखाई दे रही थी। उर्वशी ने बताया कि इस ड्रेस को तैयार करने में उनके डिजाइनर को करीब तीन महीने का समय लगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस पोशाक को पहनकर उन्हें अच्छा महसूस हो रहा था। कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने इसे देशभक्ति से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय ध्वज से मिलती-जुलती ड्रेस पहनना नियमों के मुताबिक सही है।

क्या तिरंगे को कपड़ों की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं?

भारत में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और इस्तेमाल को लेकर Flag Code of India, 2002 और Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 जैसे नियम लागू हैं। नियमों में राष्ट्रीय ध्वज के गलत इस्तेमाल और उसके अपमान को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। खास तौर पर असली राष्ट्रीय ध्वज को किसी ड्रेस, यूनिफॉर्म या पहनावे का हिस्सा बनाना उचित नहीं है। तिरंगे को काटकर या सिलकर शर्ट, साड़ी, कुर्ती, स्कर्ट या किसी अन्य परिधान का रूप देना भी नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसी तरह राष्ट्रीय ध्वज को ऐसे कपड़े या वस्तु के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उसकी गरिमा कम हो। हालांकि, सिर्फ तिरंगे के रंगों से प्रेरित डिजाइन और वास्तविक राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल में अंतर है, इसलिए किसी ड्रेस को केवल रंगों के आधार पर सीधे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान मान लेना सही नहीं होगा।

तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल करते समय उसकी गरिमा और निर्धारित नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। ध्वज को जमीन, फर्श या पानी को छूने देना, उसे फाड़ना, जलाना या जानबूझकर गलत तरीके से प्रदर्शित करना अपमान की श्रेणी में आ सकता है। राष्ट्रीय ध्वज को रुमाल, नैपकिन, कुशन या ऐसी वस्तुओं के रूप में इस्तेमाल करने पर भी नियम लागू होते हैं। वहीं, शहीदों या कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज से ढकने के लिए अलग प्रोटोकॉल निर्धारित है। इसलिए उर्वशी रौतेला की ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच सबसे जरूरी बात यह है कि तिरंगे के वास्तविक ध्वज और उसके रंगों से प्रेरित फैशन डिजाइन को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

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