नई दिल्ली: E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद गाड़ी का माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, वाहन की फ्यूल एफिशिएंसी सिर्फ पेट्रोल के प्रकार पर निर्भर नहीं करती। ड्राइविंग का तरीका, सड़क और ट्रैफिक की स्थिति, टायर में हवा, एसी का इस्तेमाल और गाड़ी की सही समय पर सर्विसिंग जैसे कई कारण माइलेज को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हर बार कम माइलेज के लिए केवल E20 पेट्रोल को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा।
E20 पेट्रोल से माइलेज पर कितना असर पड़ता है?
E20 पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल के मुकाबले कम होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए कुछ मामलों में थोड़ा अधिक ईंधन लग सकता है। सरकार पहले यह भी बता चुकी है कि कुछ वाहनों में E20 के इस्तेमाल से फ्यूल इकोनॉमी में करीब 3 से 5 फीसदी तक कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, सड़क पर मिलने वाला वास्तविक माइलेज कई अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए किसी वाहन के माइलेज में बदलाव को पूरी तरह E20 का असर मानना सही तस्वीर नहीं देता।
तेज ड्राइविंग और ट्रैफिक भी बढ़ाते हैं खर्च
माइलेज कम होने की एक बड़ी वजह ड्राइविंग स्टाइल भी हो सकती है। बार-बार तेज एक्सीलरेशन करना, अचानक ब्रेक लगाना और लगातार तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने से इंजन ज्यादा ईंधन इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा शहरों में भारी ट्रैफिक के दौरान वाहन बार-बार रुकता और चलता है। लंबे समय तक इंजन चालू रहने और बार-बार स्पीड बढ़ाने-घटाने से भी पेट्रोल की खपत बढ़ सकती है। इसलिए स्मूद ड्राइविंग और जरूरत के मुताबिक गति बनाए रखना फ्यूल बचाने में मदद कर सकता है।
टायर, AC और सर्विसिंग को न करें नजरअंदाज
गाड़ी के टायरों में सही हवा न होना भी माइलेज पर असर डाल सकता है। कम टायर प्रेशर से सड़क पर रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है और इंजन को वाहन चलाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसी तरह गर्मी के मौसम में लंबे समय तक एसी चलाने से इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, जिसका असर खास तौर पर धीमी गति और ट्रैफिक में ज्यादा दिखाई दे सकता है। इसके अलावा एयर फिल्टर, स्पार्क प्लग, इंजन ऑयल और दूसरे जरूरी पार्ट्स की समय पर सर्विसिंग नहीं होने पर भी फ्यूल एफिशिएंसी घट सकती है।
सरकार ने E20 को लेकर क्या दावा किया?
सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर यह भी कहा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के दौरान घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, जब भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थी, तब बिना इस तरह की ब्लेंडिंग के दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। उस समय उपभोक्ताओं को करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल मिला। सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों के असर को कुछ हद तक कम करने में भूमिका निभाई। ऐसे में माइलेज को लेकर वाहन चालकों को E20 के साथ-साथ अपनी ड्राइविंग और गाड़ी की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
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