नीट पेपर लीक मामले के बाद देशभर में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले को लेकर नया मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया है। CJP का कहना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान पर इतनी बड़ी कार्रवाई करने से पहले सरकार को सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपने फैसले की समीक्षा करने और कार्रवाई पर दोबारा विचार करने की अपील की है। इस मुद्दे के सामने आने के बाद शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में नई बहस शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया पर रखी अपनी बात, सरकार से आदेश वापस लेने की मांग
CJP की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि देश में पहले ही कई स्कूल बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में किसी विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने का फैसला शिक्षा के हित में नहीं माना जा सकता। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी निर्माण को लेकर विवाद है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, लेकिन शिक्षा संस्थानों को नुकसान पहुंचाने वाला कदम भविष्य पर असर डाल सकता है। CJP ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि वह इस आदेश को वापस ले और पूरे मामले पर दोबारा विचार करे ताकि छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
आखिर जौहर यूनिवर्सिटी पर क्यों हो रही है कार्रवाई?
रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इसी आधार पर इन भवनों को हटाने का आदेश जारी किया गया है। रामपुर के जिलाधिकारी के अनुसार, संस्थान को 15 दिनों का समय दिया गया है ताकि वह स्वयं आवश्यक कार्रवाई कर सके। यदि तय समय में ऐसा नहीं किया जाता है, तो विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा। दूसरी ओर, इस कार्रवाई का समाजवादी पार्टी लगातार विरोध कर रही है और इसे राजनीतिक फैसला बता रही है। फिलहाल प्रशासन अपने निर्णय को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है।
नीट आंदोलन के बाद फिर चर्चा में आई CJP
कॉकरोच जनता पार्टी हाल के महीनों में नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए आंदोलन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थी। पार्टी ने छात्रों के हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था। उस आंदोलन में सोनम वांगचुक प्रमुख चेहरों में शामिल रहे, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके के नेतृत्व में निभाई गई थी। आंदोलन के दौरान छात्रों को न्याय दिलाने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को सहायता देने जैसी मांगें उठाई गई थीं। अब पार्टी ने अपना ध्यान शिक्षा से जुड़े एक नए मुद्दे की ओर मोड़ते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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