उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों पर आरक्षण तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए शासन ने सभी जिलों से ग्राम पंचायतवार 14 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि किस पंचायत की सीट सामान्य रहेगी और किसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) या महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस कदम के बाद संभावित उम्मीदवारों की नजर अब आरक्षण सूची पर टिक गई है, क्योंकि इसी से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
जनसंख्या और पुराने आरक्षण का भी होगा पूरा आकलन
शासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में केवल जनसंख्या का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि कई अहम जानकारियां शामिल की गई हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत का नाम, कुल आबादी, ओबीसी की संख्या और प्रतिशत, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या, पंचायत में कुल वार्डों की संख्या, पहले किस वर्ग के लिए सीट आरक्षित थी और अन्य जरूरी विवरण रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। सरकार का उद्देश्य आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तथ्य आधारित बनाना है। पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बाद इस बार आरक्षण तय करने में सामाजिक और जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को विशेष महत्व दिया जा रहा है, ताकि किसी भी स्तर पर विवाद की स्थिति न बने।
कार्यकाल खत्म होने के बाद भी जिम्मेदारी संभाल रहे जनप्रतिनिधि
ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। हालांकि, नए चुनाव नहीं होने के कारण विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए सरकार ने वर्तमान जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी जारी रखने की अनुमति दी है। वहीं, उनके कुछ अधिकार सीमित भी किए गए हैं। चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे कई दावेदार पहले से ही सक्रिय थे, लेकिन चुनाव कार्यक्रम घोषित न होने के कारण उनकी गतिविधियां धीमी पड़ गई थीं। अब शासन की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद एक बार फिर गांवों से लेकर जिला स्तर तक चुनावी माहौल बनने लगा है और संभावित उम्मीदवार अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
रिपोर्ट के बाद जारी होगी आरक्षण सूची, फिर आगे बढ़ेगी चुनाव प्रक्रिया
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर उनका परीक्षण किया जाएगा। इसके आधार पर पंचायतवार आरक्षण की प्रारंभिक सूची जारी होगी। इसके बाद लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। निर्धारित समय में आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। जिला पंचायत राज अधिकारियों का कहना है कि सभी 14 बिंदुओं पर सूचनाएं तय प्रारूप में तैयार की जा रही हैं और समय सीमा के भीतर शासन को भेज दी जाएंगी। अब प्रदेशभर के लाखों संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीणों की निगाहें आरक्षण सूची और चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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