नई दिल्ली में हुए BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। तस्वीर में पीएम मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का हाथ थामे नजर आए। उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी दिखाई दिए। यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में पीएम मोदी का ईरानी राष्ट्रपति के साथ यह गर्मजोशी भरा अंदाज भारत की संतुलित विदेश नीति का संकेत माना जा रहा है।
ईरान के साथ रिश्तों पर भारत का साफ संदेश
BRICS Summit 2026 में सामने आई इस तस्वीर को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत के एक तरफ इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ भी भारत लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते बनाए हुए है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी की मुलाकात और उनकी गर्मजोशी भरी तस्वीर इसी संतुलित रुख को सामने रखती है। भारत किसी एक खेमे के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
पेजेश्कियान और पुतिन से अलग-अलग मुलाकात
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। पेजेश्कियान के साथ बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने टकराव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति को रास्ता बनाने की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, पुतिन के साथ बैठक में भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी भारत का रुख शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में बातचीत का रहा है।
समुद्री रास्तों और आम लोगों की सुरक्षा पर जोर
पश्चिम एशिया में तनाव का असर केवल राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत ने आम नागरिकों के साथ-साथ व्यावसायिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया है। पीएम मोदी ने समुद्री व्यापार की निरंतरता और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर दिया। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे समय में भारत की कोशिश है कि तनाव के बावजूद व्यापारिक रास्ते खुले रहें और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर न पड़े।
तस्वीर के पीछे दिखी भारत की संतुलित कूटनीति
पीएम मोदी, पेजेश्कियान, पुतिन और रामफोसा की एक साथ दिखाई देने वाली तस्वीर ने भारत की विदेश नीति के व्यापक रुख को भी सामने रखा। भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है, वहीं रूस और ईरान जैसे देशों के साथ भी अपने पुराने संबंधों को बनाए हुए है। यही संतुलन भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की बड़ी पहचान बनता जा रहा है। BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी की यह तस्वीर केवल एक औपचारिक मुलाकात की तस्वीर नहीं, बल्कि ऐसे समय में भारत के कूटनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। भारत का संदेश साफ है कि संवाद, शांति और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखे जा सकते हैं।
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