पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संसद पहुंचने पर उन्होंने साफ संकेत दिया कि वह राजनीति में अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। संसद परिसर में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उनसे मुलाकात कर हालचाल पूछा। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं।” उनके इस बयान को उनके आत्मविश्वास और आगे भी सक्रिय राजनीति में बने रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा कायम है और उन्हें जल्द नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
संसद में मिला जोरदार स्वागत, पार्टी ने दिया समर्थन
इस्तीफे के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे तो एनडीए के कई सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी और अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान कई नेताओं ने उनके काम की सराहना भी की। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी साफ किया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत आरोप या विवाद का परिणाम नहीं है, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा है। बीजेपी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे यह संदेश भी गया कि पार्टी ने इस्तीफे के बाद भी उन्हें पूरी तरह अपने साथ रखा है।
चुनावी रणनीति में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने कई राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी की जिम्मेदारी संभाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में उनकी पकड़ और चुनावी अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर किसी बड़े अभियान की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ओडिशा की राजनीति में भी उनका प्रभाव मजबूत माना जाता है। राज्य में बीजेपी के विस्तार और हाल के चुनावों में मिली सफलता में उनकी अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि इस्तीफे के बाद भी उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक चर्चा चल रही है।
अब सबकी नजर बीजेपी के अगले फैसले पर
फिलहाल बीजेपी की ओर से धर्मेंद्र प्रधान की नई जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें संगठन में अहम पद या आने वाले विधानसभा चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके समर्थकों का मानना है कि इस्तीफे से उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर नहीं हुई है, बल्कि जिम्मेदारी स्वीकार करने की उनकी छवि और मजबूत हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाता है। आने वाले दिनों में बीजेपी का फैसला धर्मेंद्र प्रधान की नई राजनीतिक पारी की दिशा तय कर सकता है।
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