आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता विजेता दहिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पिछले बयानों को लेकर चल रहे भारी विरोध के बीच उन्होंने एक नया वीडियो जारी कर सनसनी फैला दी है। दहिया का दावा है कि उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं और उन्हें शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि वे कोई बॉडीबिल्डर नहीं हैं जो कई लोगों से मुकाबला कर सकें, लेकिन इसके बावजूद वे अपने रुख से पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस नए बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर विवाद और ज्यादा गहरा गया है।
‘महाराज’ मानने से इनकार और पुरानी तुलना पर ऐतराज
अपने वीडियो संदेश में सीजेपी प्रवक्ता विजेता दहिया ने एक बार फिर दोहराया कि वे प्रेमानंद जी को संत या ‘महाराज’ का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपनी इस नाराजगी की वजह बताते हुए आरोप लगाया कि प्रेमानंद जी ने एक विवादित शख्सियत (आसाराम) की तुलना भगवान श्री राम और श्री कृष्ण से की थी। दहिया के मुताबिक, आस्था के प्रतीकों की इस तरह तुलना करना सरासर गलत है और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि चाहे कोई उन्हें जान से ही क्यों न मार दे, वे उन्हें अपना महाराज कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
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‘लॉ ऑफ कर्मा’ और सामाजिक मुद्दों पर उठाए तीखे सवाल
विजेता दहिया ने केवल संत पर ही निशाना नहीं साधा, बल्कि ‘लॉ ऑफ कर्मा’ (कर्म के सिद्धांत) की अवधारणा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मों की आड़ लेकर अक्सर पीड़ित (विक्टिम) को ही दोषी ठहरा दिया जाता है। उन्होंने छोटे बच्चों के साथ होने वाले अपराधों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को पूर्व जन्म के कर्मों से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है। दहिया का तर्क है कि इस तरह की सोच से समाज के वंचितों और पीड़ितों का वर्षों से शोषण होता आया है और अब इस तरह की बातों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ा तनाव, उठ रहे कई सवाल
इससे पहले भी एक पॉडकास्ट के दौरान विजेता दहिया ने प्रेमानंद महाराज पर केवल एक खास व्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। उस बयान के बाद से ही उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क उठा था। अब इस नई पोस्ट के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक तरफ जहाँ उनके समर्थकों का मानना है कि वे खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संत प्रेमानंद के अनुयायी इसे cheap publicity और आस्था का अपमान बता रहे हैं। फिलहाल, लगातार बढ़ रहे इस विवाद ने इंटरनेट और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
