भारत में लड़कियों की शादी की सही उम्र को लेकर एक बार फिर से एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी द्वारा लड़कियों की कम उम्र में शादी को लेकर दिए गए एक कथित बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह से आक्रामक हो गई है। बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने इस बयान की चौतरफा निंदा करते हुए साफ और कड़े शब्दों में कहा है कि हिंदुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है और यह सिर्फ और सिर्फ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान से ही चलेगा, यहाँ किसी भी तरह का धार्मिक कानून या शरिया लागू नहीं होगा। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
बाबूलाल मरांडी का तीखा पलटवार: ‘दिक्कत है तो छोड़ दें देश, सरकार कराएगी टिकट का इंतजाम’
इस पूरे विवाद में झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। मौलाना रशीदी के बयान पर सीधा हमला बोलते हुए मरांडी ने कहा कि जो लोग भारत के संविधान और नियमों के दायरे में रहकर नहीं जीना चाहते, उनके लिए इस देश में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों को लगता था कि हिंदू और मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते, उन्होंने अलग देश (पाकिस्तान) की मांग की और बंटवारे के वक्त वहां चले गए। मरांडी ने आगे कहा कि अगर आज भी किसी को भारतीय संविधान के अनुसार रहने में परेशानी महसूस होती है, तो वे देश छोड़ सकते हैं; और अगर उनके पास जाने के पैसे नहीं हैं, तो भारत सरकार उनके टिकट का प्रबंध कर देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में हर नागरिक को कानून का पालन सख्ती से करना ही होगा।
बीजेपी नेताओं की कड़ी निंदा: शाहनवाज हुसैन और बृजलाल ने दी नसीहत
इस विवादित बयान पर बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन और सांसद बृजलाल ने भी मौलाना को आड़े हाथों लिया। शाहनवाज हुसैन ने रशीदी के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी से मौलाना पूरे समुदाय को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि मौलाना को अपने इन शब्दों के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, पूर्व आईपीएस अधिकारी और बीजेपी सांसद बृजलाल ने तार्किक रूप से इस बात को खारिज किया कि उम्र बढ़ने की वजह से अपराध या रेप की घटनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय में जब 10 साल की उम्र में भी शादियां हो जाती थीं, तब भी महिलाओं के खिलाफ अपराध होते थे। बृजलाल ने स्पष्ट किया कि अपराध का संबंध उम्र से नहीं बल्कि अपराधी की मानसिकता से होता है, इसलिए शरिया की पैरवी करना बंद किया जाना चाहिए।
क्या है मौलाना साजिद रशीदी का पक्ष? ‘बयान को मरोड़ा गया, हो रही है राजनीति’
चारों तरफ से घिरने और भारी आलोचना का सामना करने के बाद मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने दावा किया कि उनके पुराने बयानों को तोड़-मरोड़कर और संदर्भ से बाहर (Out of Context) पेश किया जा रहा है ताकि इस पर राजनीतिक रोटियां सेकी जा सकें। रशीदी ने अपने बचाव में तर्क दिया कि उन्होंने कभी भी 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी करने की वकालत या समर्थन नहीं किया था। उनका कहना है कि उनके बयान का गलत मतलब निकालकर उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि मौलाना की इस सफाई के बाद यह सियासी उबाल थमता है या आने वाले दिनों में यह विवाद कोई नया मोड़ लेता है।
