पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के करीब 50 विधायक एकजुट होकर अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं और भविष्य में बड़ा राजनीतिक कदम उठा सकते हैं। रिजू दत्ता के अनुसार, इन विधायकों ने हाल ही में एक होटल में बैठक की और पार्टी की वर्तमान कार्यशैली को लेकर चर्चा की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बयान सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसे दावों में सच्चाई होती है तो यह TMC के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दो विधायकों के पत्र से शुरू हुआ पूरा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत दो विधायकों के एक पत्र से जुड़ी बताई जा रही है। रिजू दत्ता का कहना है कि टीएमसी विधायक रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दावा किया कि कुछ दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी ने दोनों नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया। दत्ता का आरोप है कि इसके बाद पार्टी के भीतर नाराजगी और बढ़ गई। उनका कहना है कि कई विधायक नेतृत्व की कार्यशैली और फैसलों से असहमत हैं। इसी कारण कुछ नेताओं ने अलग-अलग स्तर पर बातचीत शुरू की है। दत्ता ने दावा किया कि हाल के दिनों में कई बैठकें हुईं, जिनमें पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा की गई। हालांकि पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और टूट की खबरें केवल राजनीतिक अफवाहें हैं।
‘हम ही असली TMC हैं’ वाले दावे ने बढ़ाया सस्पेंस
रिजू दत्ता ने सबसे बड़ा दावा यह किया कि कथित तौर पर एक समूह खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” मानता है और पार्टी के चुनाव चिह्न पर भी अधिकार जताने की तैयारी कर रहा है। उनके अनुसार, कुछ विधायक यह मानते हैं कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है और वे संगठन के भीतर अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। दत्ता ने कहा कि यह समूह विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपनी बात रखने की योजना बना रहा है। उनके बयान के अनुसार, संबंधित विधायक यह दावा कर सकते हैं कि उनके पास दो-तिहाई समर्थन है और इसलिए संगठन में उनकी भूमिका को मान्यता मिलनी चाहिए। हालांकि अभी तक इस तरह के किसी औपचारिक कदम की पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय राजनीति में चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है, इसलिए ऐसे दावे स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। बंगाल की राजनीति में भी इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
ममता और अभिषेक बनर्जी पर भी उठाए सवाल
अपने बयान में रिजू दत्ता ने पार्टी नेतृत्व को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर जो भी असंतोष दिखाई दे रहा है, उसकी जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी चाहिए। दत्ता का कहना है कि जिन नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, उनमें से कुछ अब नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। दत्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ नेता संगठन की चुनावी रणनीति और सलाहकार टीम की भूमिका को लेकर असंतुष्ट हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस लगातार यह कहती रही है कि पार्टी मजबूत स्थिति में है और विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में यदि इस मुद्दे पर पार्टी या संबंधित विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान आता है, तो बंगाल की राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है। फिलहाल रिजू दत्ता के दावों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं और सभी की नजर अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
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