उत्तर प्रदेश (UP) में शहरों और कस्बों के नाम बदलने का सिलसिला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे के एक और ऐतिहासिक क्षेत्र का नाम बदलने का बड़ा ऐलान करके सबको चौंका दिया है। इस बार बारी कुशीनगर जिले के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध कस्बे ‘फाजिलनगर’ की है। मंगलवार (2 जून) को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस नाम परिवर्तन की घोषणा की। सीएम के इस फैसले के बाद से ही पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इस बड़े बदलाव को लेकर बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं।
सीएम योगी का बड़ा बयान: ‘हम क्यों फाजिल कहें’
कुशीनगर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग को मंच से हरी झंडी दिखाई। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए हल्के-फुल्के लेकिन बेहद कड़े अंदाज में कहा, “आपकी जो मांग होती है, फाजिलनगर के विधायक उसे प्रमुखता से पूरा करते हैं। ऐसे में हम क्यों फाजिल कहें?” मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इस क्षेत्र के गौरव को वापस लौटाने के लिए नामकरण का आधिकारिक प्रस्ताव रख दिया गया है। सरकार का मानना है कि किसी भी जगह का नाम वहां की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से मेल खाना चाहिए, न कि किसी बाहरी प्रभाव को दर्शाता हो।
अब इस नए नाम से जाना जाएगा फाजिलनगर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के मुताबिक, अब फाजिलनगर को ‘पावागढ़’ के नाम से जाना जाएगा। दरअसल, इस क्षेत्र का संबंध प्राचीन काल से और भगवान बुद्ध व जैन धर्म के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पौराणिक काल में इस जगह का महत्व बेहद खास था, जिसे समय के साथ बदल दिया गया था। अब योगी सरकार इसे ‘पावागढ़’ नाम देकर इसके प्राचीन गौरव और धार्मिक पर्यटन को एक नई पहचान देने की कोशिश कर रही है। सरकार के इस कदम को स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है।
नाम बदलने के पीछे का सियासी और सांस्कृतिक गणित
उत्तर प्रदेश की राजनीति में नाम बदलने की कवायद कोई नई नहीं है, लेकिन इसके पीछे हमेशा एक गहरा संदेश छिपा होता है। जानकारों की मानें तो फाजिलनगर का नाम ‘पावागढ़’ करने के पीछे स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग तो थी ही, साथ ही इसके जरिए क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को मुख्यधारा में लाना भी मुख्य मकसद है। कुशीनगर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का केंद्र है, ऐसे में पावागढ़ नाम जुड़ने से इस पूरे बेल्ट की ऐतिहासिक प्रासंगिकता और मजबूत होगी। इस फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी नाम बदलने की कागजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है।
