उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि पार्टी पिछले कई वर्षों से संगठन को मजबूत करने में जुटी है और अब उसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकती है। 4 जून से शुरू होने वाली “सत्ता परिवर्तन यात्रा” को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर अपना जनाधार बढ़ाना और विधानसभा चुनाव के लिए माहौल तैयार करना है।
गठबंधन पर खुला रुख, लेकिन बीजेपी से दूरी साफ
चंद्रशेखर आजाद ने गठबंधन को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने सभी राजनीतिक विकल्प खुले रखे हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता। उनके अनुसार, भाजपा के साथ वैचारिक मतभेद हैं और इसी वजह से उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा नहीं बनेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो भी दल भाजपा को चुनौती देने और उसे रोकने की कोशिश करेगा, उसके साथ बातचीत की जा सकती है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में आजाद समाज पार्टी विपक्षी दलों के साथ किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। फिलहाल पार्टी ने किसी विशेष दल का नाम नहीं लिया है, लेकिन इतना जरूर साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन से बढ़ा आत्मविश्वास
चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी के बढ़ते प्रभाव का उदाहरण 2024 के लोकसभा चुनाव को बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया और नगीना सीट पर जीत हासिल की। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी पार्टी को उल्लेखनीय समर्थन मिला। उनका मानना है कि इसी प्रदर्शन ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है और संगठन को नई ऊर्जा दी है। आजाद ने कहा कि पार्टी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों से लगातार संवाद कर रही है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं, किसानों, मजदूरों और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के बीच उनकी पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ रही है। इसी विश्वास के आधार पर वह 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर नतीजों की उम्मीद जता रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी केवल भागीदारी के लिए नहीं, बल्कि मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के उद्देश्य से मैदान में उतरेगी।
खुद को सिर्फ दलित नेता मानने से किया इनकार
चंद्रशेखर आजाद ने उन धारणाओं पर भी सवाल उठाए जिनमें उन्हें केवल दलित राजनीति तक सीमित नेता बताया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है और उन्हें अलग-अलग जातियों, धर्मों और समुदायों का समर्थन मिलता है। उन्होंने नगीना लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें दलितों के साथ-साथ मुस्लिम, पिछड़े और सामान्य वर्ग के मतदाताओं का भी समर्थन मिला। आजाद ने दावा किया कि उनकी पार्टी संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसरों की राजनीति करती है। उन्होंने बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुख चुनावी विषय बताया। उनका कहना है कि आने वाले समय में आजाद समाज पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सत्ता परिवर्तन यात्रा के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने दम पर मैदान में उतरती है या फिर किसी बड़े विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई तस्वीर पेश करती है।
