पंजाब की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर नया विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य के कई शहरों और कस्बों में ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के सामाजिक बहिष्कार की अपील की गई है। इन पोस्टरों में धार्मिक आदेश का हवाला देते हुए लोगों से एक विशेष अभियान का समर्थन करने की बात कही गई है। बठिंडा, मोगा, नाभा और अन्य इलाकों में लगे इन पोस्टरों के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। इस पूरे मामले ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है। पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे यह मुद्दा पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया है।
कथित वीडियो को लेकर बढ़ा विवाद
पूरा विवाद एक कथित वीडियो को लेकर शुरू हुआ, जिसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ पक्षों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं, जबकि मुख्यमंत्री लगातार इस बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वीडियो में वह नहीं हैं और उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उनके विरोधी उनकी छवि खराब करने के लिए झूठी और भ्रामक सामग्री फैला रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस मामले को गंभीर बताते हुए लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।
फर्जी रिपोर्ट के आरोप और पुलिस कार्रवाई
इस मामले में एक और मोड़ तब आया जब हरियाणा पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन लोगों ने कथित वीडियो से जुड़ी एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रिपोर्ट किस आधार पर बनाई गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। इस कार्रवाई के बाद विवाद और गहरा गया है। विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जबकि अन्य इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
विवाद बढ़ने के साथ ही पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। विपक्षी दल मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रही है। कई नेताओं ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है, वहीं पार्टी समर्थक उनके बचाव में सामने आए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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