दिल्ली में आवारा पशुओं की समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस बार इसका शिकार आम नागरिक नहीं, बल्कि बीजेपी की महिला पार्षद शशि चंदना बनी हैं। जानकारी के अनुसार, 24 जून की सुबह वह अपने क्षेत्र के एक मंदिर से पूजा करके घर लौट रही थीं। इसी दौरान सड़क पर घूम रहे एक आवारा पशु ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि वह संतुलन खो बैठीं और हवा में उछलकर सड़क पर सिर के बल गिर गईं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पहले भी कई बार कर चुकी थीं शिकायत
घटना के बाद शशि चंदना ने बताया कि उनके इलाके में लंबे समय से आवारा मवेशियों की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कई बार नगर निगम (एमसीडी) से इस संबंध में शिकायत भी की थी, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह हादसा नहीं होता। उनके पति मोहन चंदना ने बताया कि पार्षद की पसलियों और सिर में चोट आई है। अस्पताल में जरूरी जांच की गई है और रिपोर्ट आने के बाद ही चोटों की गंभीरता का पूरी तरह पता चल सकेगा। डॉक्टर फिलहाल उन्हें निगरानी में रखे हुए हैं।
आवारा पशुओं को लेकर लगे गंभीर आरोप
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी इलाके में घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर नाराजगी जताई। शशि चंदना के परिवार का आरोप है कि कुछ लोग अवैध डेयरी चलाते हैं और दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। यही पशु बाद में राहगीरों के लिए खतरा बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ऐसे मवेशी सड़क पर लड़ते हैं या अचानक लोगों पर हमला कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
आंकड़े बता रहे हैं कि समस्या अभी भी गंभीर है
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में हर साल हजारों आवारा मवेशियों को पकड़ने का अभियान चलाया जाता है। वर्ष 2024-25 में 13 हजार से अधिक आवारा पशुओं को पकड़ा गया था, जबकि 2025-26 में भी यह संख्या लगभग इतनी ही रही। मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में भी दो हजार से ज्यादा मवेशियों को सड़कों से हटाया जा चुका है। इसके बावजूद राजधानी में आवारा पशुओं की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। यही वजह है कि अब इस हादसे के बाद फिर से सवाल उठ रहे हैं कि नियमित अभियान चलने के बावजूद सड़कों पर इतने अधिक आवारा पशु कैसे मौजूद हैं। लोगों का मानना है कि केवल पशुओं को पकड़ना ही काफी नहीं, बल्कि उन्हें सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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