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जून की शुरुआत में महंगा हुआ LPG सिलेंडर, नए रेट देखकर कारोबारियों की बढ़ी चिंता

 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत कई शहरों में नई कीमतें लागू हो गई हैं। जानिए आपके शहर में गैस सिलेंडर का नया रेट और कीमत बढ़ने की वजह।

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LPG Price Hike June 2026: जून महीने की शुरुआत के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव कर दिया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत बढ़ने की संभावना है। नई दरें 1 जून से लागू हो गई हैं। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर महीने की पहली तारीख को ईंधन उत्पादों की कीमतों की समीक्षा की जाती है और इसी प्रक्रिया के तहत नए रेट जारी किए गए हैं। कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे उनके संचालन खर्च पर सीधा असर पड़ सकता है।

देश के बड़े शहरों में बढ़े नए रेट

नई कीमतों के बाद देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये पहुंच गई है। मुंबई में यह 3067 रुपये, कोलकाता में 3255 रुपये और चेन्नई में 3283 रुपये हो गई है। इसके अलावा लखनऊ, पटना, हैदराबाद, जयपुर, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। कुछ शहरों में कीमतें 3300 रुपये के करीब पहुंच गई हैं, जबकि पटना में यह आंकड़ा 3400 रुपये से भी ऊपर चला गया है। दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडर के दाम पुराने स्तर पर ही बने हुए हैं। इससे करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू और कमर्शियल दरों को अलग-अलग आधार पर तय किया जाता है, इसलिए दोनों में एक साथ बदलाव जरूरी नहीं होता।

व्यापारियों पर बढ़ेगा दबाव, ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर

कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने का सीधा असर उन व्यवसायों पर पड़ता है जो रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी का उपयोग करते हैं। रेस्टोरेंट, होटल, मिठाई की दुकानें, फूड स्टॉल और कैटरिंग सेवाएं इसके प्रमुख उदाहरण हैं। लागत बढ़ने के बाद कई कारोबारी अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इसका प्रभाव आम ग्राहकों की जेब पर भी दिखाई दे सकता है। खाद्य उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ईंधन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पहले से ही कारोबारियों के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी उनके खर्च को और बढ़ा सकती है। हालांकि कई व्यवसायी उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति सुधरने पर कीमतों में राहत मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय हालात और आयात पर निर्भरता का असर

एलपीजी और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतें केवल घरेलू बाजार से तय नहीं होतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी इन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। खासकर खाड़ी देशों से आने वाली गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह का तनाव, युद्ध, सप्लाई में बाधा या कच्चे तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर भारतीय बाजार को प्रभावित करती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन लागत और सरकारी नीतियां भी गैस सिलेंडर की कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि हर महीने की शुरुआत में नई दरों की घोषणा की जाती है। फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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