भारत के खिलाफ सीमा पार से एक बार फिर बहुत बड़ी और खौफनाक साजिश रची जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने जो खुलासे किए हैं, उसने देश के सुरक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने भारत में तबाही मचाने के लिए एक साथ दो मोर्चे (टू-फ्रंट) खोल दिए हैं। इस बार इस नापाक ऑपरेशन को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी किसी और को नहीं, बल्कि डी-कंपनी के सबसे कुख्यात और छोटा शकील के बेहद भरोसेमंद गुर्गे मुन्ना झिंगाड़ा को सौंपी गई है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में दाऊद इब्राहिम के महफूज ठिकाने के पास से ही मुन्ना झिंगाड़ा इस पूरे टेरर नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है। हाल ही में देश के अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ में यह साफ हुआ है कि मुन्ना वीडियो कॉल के जरिए भारत में बैठे अपने स्लीपर सेल्स के संपर्क में था और बड़े धमाकों की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा था।
नशे की लत का फायदा: युवाओं को मोहरा बना रही डी-कंपनी
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह है कि इस बार अंडरवर्ल्ड किसी पेशेवर अपराधी को नहीं, बल्कि समाज के भटके हुए युवाओं को निशाना बना रहा है। मुन्ना झिंगाड़ा और उसके साथियों ने ऐसे युवाओं की लिस्ट तैयार की है जो नशे की लत से जूझ रहे हैं और जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल चैट से पता चला है कि इन युवाओं को ड्रग्स और मोटी रकम का लालच देकर देश विरोधी गतिविधियों में धकेला जा रहा था। इतना ही नहीं, मुन्ना ने युवाओं में अपना खौफ और रसूख बनाए रखने के लिए पाकिस्तान से अपनी कुछ ताजा तस्वीरें भी भारत भेजी थीं। इस चैट में हथियारों की सप्लाई, हैंड ग्रेनेड और आधुनिक तकनीक यानी ड्रोन के जरिए सामान डिलीवर करने जैसे खतरनाक मंसूबों का जिक्र मिला है। डी-कंपनी इन युवाओं को काम के बदले विदेश में सैटल करने का लालच भी दे रही थी।
दाऊद की ढलती उम्र: संगठन में नए चेहरों की एंट्री
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील अब बूढ़े हो चुके हैं और मुंबई समेत देश के अन्य हिस्सों में उनका पुराना खौफ कम हो रहा है। इसी घटते प्रभाव को दोबारा जिंदा करने के लिए डी-कंपनी अब नए और आक्रामक चेहरों को फ्रंट पर ला रही है। मुन्ना झिंगाड़ा को कमान सौंपने के पीछे की मुख्य वजह यह है कि मुंबई के जरायम क्रेडिबिलिटी में उसके पुराने संपर्क आज भी जिंदा हैं। मुन्ना के इस काम में उसका सबसे खास गुर्गा ‘हुफैजा’ सीधे तौर पर उसकी मदद कर रहा है। हुफैजा फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है और उसकी गिरफ्तारी के लिए देश के कई कोनों में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। खुफिया इनपुट हैं कि यह मॉड्यूल दिल्ली और मुंबई जैसे देश के सबसे बड़े महानगरों को दहलाने की फिराक में था, ताकि एक बार फिर डी-कंपनी की दहशत कायम की जा सके।
कश्मीर में नई चाल: राजनीतिक दलों में घुसपैठ की कोशिश
इस साजिश का दूसरा और सबसे खतरनाक हिस्सा जम्मू-कश्मीर से जुड़ा है। घाटी में आतंक फैलाने में नाकाम रहने के बाद अब आईएसआई ने अपनी रणनीति बदल ली है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, कश्मीर में सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW), जो आतंकियों को रसद और जानकारी पहुंचाते हैं, उन्हें अब स्थानीय राजनीतिक दलों में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। इस नई चाल के पीछे की वजह बेहद शातिर है। राजनीतिक दलों की सदस्यता लेने के बाद ये तत्व सुरक्षा बलों की पैनी नजर से बच जाएंगे। वे नेताओं की आड़ में गुप्त बैठकें कर सकेंगे, युवाओं को भड़का सकेंगे और बिना किसी शक के संगठन के लिए फंड (वित्तीय संसाधन) जुटा सकेंगे। एजेंसियों के लिए यह नई चुनौती है, क्योंकि राजनीतिक चोला ओढ़ने के बाद इन देशद्रोहियों की पहचान करना थोड़ा जटिल हो जाता है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और इस पूरे डिजिटल व वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई हैं।
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