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‘भारत माता का अपमान’—महिला आरक्षण बिल पर फूटा योगी का गुस्सा, विपक्ष ने दिया करारा जवाब

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने पर सियासी घमासान तेज। योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘काला अध्याय’ बताया, जबकि राहुल गांधी ने कहा—संविधान पर हमला रोका गया। जानें पूरा मामला।

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लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बहुप्रतीक्षित संविधान संशोधन बिल पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब यह जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। मतदान के दौरान पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने मत दिया। लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक संख्या न जुट पाने के कारण यह बिल प्रारंभिक स्तर पर ही पारित नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि बिल आगे की प्रक्रिया के लिए योग्य नहीं रह गया है। इस घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

योगी आदित्यनाथ का तीखा हमला—‘काला अध्याय’ करार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का “काला अध्याय” बताया। योगी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को पारित न होने देना ‘भारत माता’ के सम्मान पर सीधा आघात है। उनके मुताबिक यह केवल एक विधायी विफलता नहीं, बल्कि देश की मातृशक्ति के अधिकारों के साथ विश्वासघात है। उन्होंने विपक्ष पर नारी विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को देख रही हैं और समय आने पर इसका जवाब देंगी।

विपक्ष का पलटवार—राहुल गांधी बोले ‘संविधान पर हमला’

वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने इस बिल को लेकर बिल्कुल अलग रुख अपनाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल वास्तव में महिला सशक्तिकरण के नाम पर संविधान की मूल संरचना को बदलने की कोशिश थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने इस “हमले” को रोक दिया है, जो लोकतंत्र के लिए जरूरी था। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह बिल असली महिला आरक्षण नहीं था, बल्कि राजनीतिक समीकरणों को बदलने की रणनीति थी। उनके इस बयान के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।

आगे क्या? महिला आरक्षण पर राजनीति तेज

महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। जहां एनडीए सरकार इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक चाल बता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पहले भी इस बिल को ऐतिहासिक कदम बता चुकी है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इसे फिर से नए रूप में पेश करेगी या यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक हथियार बनेगा। फिलहाल इतना तय है कि ‘नारी शक्ति’ का मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति के केंद्र में बना रहेगा।

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