पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी घमासान देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पूर्व मेदिनीपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। अपने भाषण में योगी ने कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के बयान का जिक्र करते हुए बंगाल की भाषा और संस्कृति को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में सिर्फ बांग्ला भाषा ही प्रमुख रहेगी और किसी अन्य भाषा को थोपने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और इसे लेकर पक्ष-विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
भाषा और संस्कृति पर सीधा वार
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपरा से है और इसे किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें राज्य की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। योगी ने कहा कि अगर किसी को उर्दू बोलनी है तो वह ऐसे स्थान पर जाए जहां यह भाषा प्रमुख है, लेकिन बंगाल में बांग्ला ही प्राथमिक भाषा रहेगी। इस बयान को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है, जबकि बीजेपी इसे सांस्कृतिक संरक्षण का मुद्दा बता रही है।
कानून व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
रैली के दौरान योगी आदित्यनाथ ने केवल भाषा ही नहीं बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति तभी संभव है जब वहां की महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ का जिक्र करते हुए कहा कि अपराध और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। योगी के इस बयान ने एक बार फिर “बुलडोजर पॉलिटिक्स” को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास और सुरक्षा के बिना किसी भी राज्य में स्थिरता संभव नहीं है।
बंगाल में बड़े नेताओं की एंट्री से बढ़ेगा मुकाबला
पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इसी के चलते भारतीय जनता पार्टी ने भी अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है और बड़े नेताओं की रैलियों का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नेता लगातार रैलियों के जरिए जनता को साधने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का फोकस खासतौर पर उन क्षेत्रों पर है जहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह चुनावी लड़ाई और भी दिलचस्प और तीखी हो सकती है।
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