उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। खासकर वाराणसी जनपद, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गढ़ माना जाता है, इस बार चुनावी चर्चा में है। हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने वाराणसी के तीन प्रमुख विधानसभा सीटों पर अगले चुनाव में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। वाराणसी जनपद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल आठ विधानसभा सीटें हैं, जिनमें बीजेपी और उसके समर्थित दलों का पिछले दस सालों से लगातार कब्जा रहा है। AIMIM की एंट्री इन सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। पार्टी के जिला उपाध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी ने बताया कि तीनों सीटों के लिए पार्टी को हरी झंडी मिल चुकी है और यहां बिना किसी समझौते के सीधे चुनाव लड़ेंगे।
AIMIM की रणनीति और मुस्लिम वोट का असर
मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि AIMIM का चुनाव लड़ना राजनीतिक खेमे में हलचल मचाने वाला होगा। कारण यह है कि इन विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर काफी मजबूत है। AIMIM का लक्ष्य है कि कुछ प्रतिशत वोट लेकर चुनावी नतीजे को प्रभावित किया जाए। AIMIM की एंट्री सिर्फ बीजेपी को ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी (सपा) के समीकरण को भी प्रभावित कर सकती है। पिछले चुनावों के नतीजों के अनुसार, इन सीटों पर छोटे-छोटे वोट शेयर का असर जीत-हार में निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि राजनीतिक दल इस एंट्री को गंभीरता से देख रहे हैं।
दक्षिणी, उत्तरी और कैंट सीटें क्यों हैं खास
वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में दक्षिणी, उत्तरी और कैंट सीटें सबसे ज्यादा चर्चित हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में दक्षिणी विधानसभा सीट पर बीजेपी के डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बेहद कम अंतर से जीत हासिल की थी। यह सीट दशकों से बीजेपी के लिए मजबूत मानी जाती रही है। कैंट और उत्तरी विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची (SIR प्रक्रिया) के पहले चरण में कई मतदाताओं के नाम शामिल नहीं होने की खबरें सामने आई थीं। इससे भी इस क्षेत्र की चुनावी तैयारी और रणनीति को प्रभावित होने की संभावना है। इन सीटों पर AIMIM की एंट्री के बाद चुनावी समीकरण में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
BJP के लिए सियासी चुनौती
वाराणसी में पीएम मोदी के गढ़ में AIMIM की एंट्री से बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दक्षिणी, उत्तरी और कैंट सीटों में कुछ प्रतिशत वोट AIMIM की वजह से बीजेपी और सपा के लिए निर्णायक हो सकते हैं। आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की रणनीति, जातीय समीकरण और मुस्लिम वोट का असर निर्णायक भूमिका निभाएगा। बीजेपी को अपने समर्थन बेस को मजबूत करने के साथ-साथ AIMIM के खिलाफ भी तैयारी करनी होगी। ऐसे में वाराणसी विधानसभा सीटें 2027 के यूपी चुनाव में बेहद रोमांचक और निर्णायक साबित हो सकती हैं।
