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34 एनकाउंटर करने वाले इंस्पेक्टर ने बताया: कैसे पुलिस के सामने अतीक अहमद की पेशाब निकल गई

दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर विनय त्यागी ने अतीक अहमद की गिरफ्तारी का खुलासा किया। जानें कैसे डर और रणनीति ने बड़े माफिया को कानून के सामने लाया, और धुरंधर 2 फिल्म में दिखाया गया यह सच।”

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दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर विनय त्यागी ने पहली बार 2008 में अतीक अहमद की गिरफ्तारी की पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि अतीक, जिसे अपराध की दुनिया में “डर का नाम” माना जाता था, उस वक्त दिल्ली में छिपा हुआ था। राजू पाल हत्याकांड के बाद उस पर यूपी पुलिस से 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था। विनय त्यागी ने कहा कि अतीक की लोकेशन पता करने के लिए पुलिस ने कई महीनों तक ट्रैकिंग और निगरानी की। अंततः गालिब अपार्टमेंट्स, पीतमपुरा में ठहरने की सूचना मिली और टीम ने पूरी प्लानिंग के साथ 31 जनवरी 2008 को शाम करीब 4 बजे ऑपरेशन अंजाम दिया।

गिरफ्तारी के दौरान का डर और मानवता

विनय त्यागी के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने अतीक अहमद की कनपटी पर पिस्टल तानी, अतीक बुरी तरह घबरा गया और डर के मारे उसकी पेशाब निकल गई। विनय त्यागी ने बताया कि उस दिन दिल्ली में तापमान केवल 6 डिग्री था, लेकिन अतीक के डर के कारण उसने दो बोतल ठंडा पानी भी पी लिया। अतीक को डर था कि कहीं यह टीम यूपी STF की न हो और उसका एनकाउंटर न कर दिया जाए। जैसे ही अतीक को स्पेशल सेल के दफ्तर लाया गया, उसे राहत महसूस हुई। यह घटना दर्शाती है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा माफिया क्यों न हो, कानून के सामने उसका डर असली होता है।

अतीक का आपराधिक इतिहास और फिल्म में झलक

इंस्पेक्टर विनय त्यागी ने बताया कि उस समय अतीक अहमद के खिलाफ 111 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके पास करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा करने के मामले भी दर्ज थे। वह वूमेनाइजर भी था और फरारी के दौरान काफी सीक्रेटी में रहता था। अतीक की गिरफ्तारी और तीस हजारी कोर्ट में पेशी के दौरान विनय त्यागी की तस्वीर फिल्म धुरंधर 2 में दिखाई गई है। फिल्म में यह सीन इस बात को दर्शाता है कि कैसे पुलिस ने बेहद सावधानी से और पेशेवर तरीके से अतीक को गिरफ्तार किया।

कानून के सामने अपराधियों का डर और प्रशासनिक चुनौती

विनय त्यागी ने यह भी बताया कि अपराधियों का बड़ा नाम होने के बावजूद कानून के सामने उनका डर असली होता है। उन्होंने शिवानी भटनागर केस का भी जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन मंत्री ने केस में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। इस कहानी से यह साबित होता है कि पुलिस की रणनीति, धैर्य और पेशेवर तरीके से ही बड़े अपराधियों को कानून के सामने लाया जा सकता है। अतीक अहमद की गिरफ्तारी एक ऐसा उदाहरण है, जो दिखाता है कि अपराधियों का भय और इंस्पेक्टर का साहस कैसे इतिहास में दर्ज होता है।

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