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‘नो किंग्स’ बगावत से कांपा अमेरिका! सड़कों पर उतरे लाखों लोग, क्या Donald Trump की कुर्सी पर मंडरा रहा बड़ा खतरा?

अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन ने जोर पकड़ा, 50 राज्यों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। जानिए क्यों भड़का जनता का गुस्सा और क्या इससे Donald Trump की सत्ता पर असर पड़ेगा।

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अमेरिका में इस समय राजनीतिक और सामाजिक माहौल बेहद गर्म नजर आ रहा है। “नो किंग्स” यानी “कोई राजा नहीं” आंदोलन के तहत देश के सभी 50 राज्यों में हजारों रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के मुताबिक इस बार करीब 90 लाख लोगों के सड़कों पर उतरने का अनुमान है, जो इस आंदोलन को अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बना सकता है। खास बात यह है कि यह विरोध सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई।

जंग और घरेलू नाराजगी: दो मोर्चों पर घिरा अमेरिका

अमेरिका इस समय एक साथ दो बड़े संकटों का सामना कर रहा है। एक ओर पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्सा उबाल पर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युद्ध में बढ़ती मौतें और घरेलू नीतियों का असर आम लोगों पर भारी पड़ रहा है। इसी वजह से “नो किंग्स” आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है।

मिनेसोटा बना विरोध का केंद्र, बड़े नाम भी जुड़े

इस बार आंदोलन का मुख्य केंद्र मिनेसोटा का सेंट पॉल शहर रहा, जहां सबसे बड़ी रैली आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में कई प्रसिद्ध हस्तियों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें अभिनेता Robert De Niro, गायिका Joan Baez, अभिनेत्री Jane Fonda और सीनेटर Bernie Sanders शामिल रहे। कार्यक्रम में संगीत, भाषण और नारों के जरिए लोगों ने एकजुटता दिखाई और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। यह रैली आंदोलन के बढ़ते प्रभाव का संकेत मानी जा रही है।

किन मुद्दों पर भड़का गुस्सा? जनता ने साफ किया संदेश

प्रदर्शनकारियों की नाराजगी कई मुद्दों पर केंद्रित रही। सबसे बड़ा मुद्दा इमिग्रेशन नीति को लेकर था, जिसे लेकर लोगों में डर और असंतोष देखा गया। इसके अलावा ईरान के खिलाफ बढ़ते सैन्य कदमों, ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती और अमीर वर्ग के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी लोगों ने विरोध जताया। वॉशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क और सैन डिएगो तक लोगों ने बैनर और नारों के जरिए अपना संदेश दिया कि वे डरकर घर बैठने वाले नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह बढ़ता जनआंदोलन आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति की दिशा बदल सकता है।

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