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नंदीग्राम में ‘गुरु बनाम शागिर्द’ की जंग! ममता का ऐसा दांव, जो बदल सकता है बंगाल का सियासी खेल

नंदीग्राम सीट पर TMC ने शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके करीबी रहे पबित्र कर को उतारकर बड़ा दांव चला है। जानिए कैसे ‘गुरु बनाम शागिर्द’ की यह लड़ाई बदल सकती है बंगाल की राजनीति।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासत एक बार फिर नंदीग्राम के इर्द-गिर्द सिमटती नजर आ रही है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुनावी रणभेरी बजा दी है। इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा नंदीग्राम सीट को लेकर हो रही है, जहां पार्टी ने एक बेहद रणनीतिक फैसला लेते हुए शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके ही करीबी रहे पबित्र कर को मैदान में उतार दिया है। यह कदम सिर्फ एक टिकट वितरण नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। TMC ने इस दांव के जरिए साफ संकेत दिया है कि वह इस बार नंदीग्राम की हार का बदला लेने के मूड में है और किसी भी कीमत पर इस सीट को जीतना चाहती है।

‘शागिर्द’ की चुनौती से बढ़ी सियासी गर्मी**

नंदीग्राम की लड़ाई इस बार और भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि मुकाबला सिर्फ दो दलों का नहीं, बल्कि पुराने रिश्तों का भी है। पबित्र कर, जो कभी शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाते थे, अब उन्हीं के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। बताया जाता है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में पबित्र कर ने जमीनी स्तर पर शुभेंदु अधिकारी के लिए काफी मेहनत की थी, जिसका फायदा बीजेपी को मिला और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नंदीग्राम जैसी अहम सीट पर जीत दर्ज की। अब वही पबित्र कर टीएमसी के टिकट पर मैदान में उतरकर अपने पूर्व ‘गुरु’ को चुनौती दे रहे हैं। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सियासी तापमान बढ़ गया है, बल्कि पूरे राज्य में इस सीट पर नजरें टिक गई हैं। यह मुकाबला व्यक्तिगत, राजनीतिक और रणनीतिक—तीनों स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है।

2021 की हार का बदला लेने की कोशिश**

नंदीग्राम सीट का महत्व 2021 के चुनाव के बाद और बढ़ गया था, जब शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करीब 1,900 वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया था। यह हार टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका थी क्योंकि यह सीट मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई थी। उसी हार को ध्यान में रखते हुए इस बार टीएमसी ने पूरी रणनीति बदल दी है। पबित्र कर का चयन इस बात का संकेत है कि पार्टी स्थानीय समीकरणों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। कर पहले भी टीएमसी से जुड़े रहे हैं और इलाके में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। इसके अलावा, उनकी पत्नी का पंचायत स्तर पर प्रभाव भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। टीएमसी को उम्मीद है कि पबित्र कर के जरिए वह उन वोटरों तक पहुंच बना पाएगी, जो पहले बीजेपी की तरफ झुक गए थे।

नंदीग्राम में कांटे की टक्कर के आसार

अगर नंदीग्राम के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की बात करें, तो यहां दो ब्लॉकों में बंटी राजनीति साफ दिखाई देती है। नंदीग्राम-2 ब्लॉक में बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जाती है, और यही पबित्र कर का क्षेत्र भी है। ऐसे में उनका उम्मीदवार बनना सीधे-सीधे बीजेपी के मजबूत गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होगा और नतीजा आखिरी दौर तक अनिश्चित रह सकता है। एक तरफ शुभेंदु अधिकारी का अनुभव और संगठनात्मक पकड़ है, तो दूसरी तरफ टीएमसी का नया दांव और स्थानीय समर्थन। यह चुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन सकता है। आने वाले दिनों में नंदीग्राम एक बार फिर राज्य की सबसे हॉट सीट बनकर उभर सकता है।

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