Tuesday, March 10, 2026
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“ट्रॉफी मंदिर क्यों ले गए?” टीम इंडिया की जीत के जश्न पर भड़के 1983 वर्ल्ड कप विजेता कीर्ति आजाद, बोले— खेल का कोई धर्म नहीं

टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने पर 1983 वर्ल्ड कप विजेता कीर्ति आजाद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खेल का कोई धर्म नहीं होता और यह पूरे भारत की जीत है। जानें पूरा विवाद और मैच का हाल।

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भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद जहां पूरे देश में जश्न का माहौल है, वहीं एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, मुख्य कोच गौतम गंभीर और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अध्यक्ष जय शाह स्टेडियम के पास स्थित एक हनुमान मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनके साथ टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी भी थी। इसी बात को लेकर अब 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि खेल किसी एक धर्म या समुदाय से जुड़ा नहीं होता और इसे धार्मिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

कीर्ति आजाद बोले— खेल किसी धर्म का नहीं होता

कीर्ति आजाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो पूरे देश को जोड़ता है। टीम इंडिया में अलग-अलग धर्म और समुदाय के खिलाड़ी होते हैं, इसलिए यह जीत पूरे भारत की जीत है। उनके मुताबिक किसी एक धार्मिक स्थल पर ट्रॉफी ले जाना सही संदेश नहीं देता। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर वह मानते हैं कि खेल को हमेशा धर्म और राजनीति से दूर रखना चाहिए। आजाद ने यह भी कहा कि जब भारतीय टीम जीतती है तो देश के हर धर्म और समुदाय के लोग खुश होते हैं। इसलिए जीत का जश्न भी उसी भावना के साथ मनाया जाना चाहिए जो पूरे देश को साथ लेकर चले।

सोशल मीडिया पर भी जताई नाराजगी

कीर्ति आजाद ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि जब कपिल देव की कप्तानी में 1983 में भारत ने विश्व कप जीता था, तब टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी थे और उस जीत को पूरे देश की जीत माना गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ट्रॉफी मंदिर ले जाई जा सकती है तो फिर मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं ले जाई गई। उनके अनुसार भारतीय टीम देश का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक व्यक्ति या परिवार का नहीं। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी पूरे देश के लोगों की है और इसे किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना सही नहीं है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई और कई लोगों ने इस पर अलग-अलग राय दी।

मैदान पर भारत की ऐतिहासिक जीत

हालांकि इस विवाद के बीच भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन की भी खूब चर्चा हो रही है। फाइनल मैच में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। अभिषेक शर्मा ने तेज अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई, जबकि संजू सैमसन और ईशान किशन ने भी महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। इसके बाद अंत के ओवरों में शिवम दुबे ने तेज रन बनाकर टीम का स्कोर 255/5 तक पहुंचा दिया, जो टी20 विश्व कप फाइनल के इतिहास में सबसे बड़ा स्कोर माना जा रहा है। लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाई और भारत ने 96 रन से शानदार जीत दर्ज कर ली। इस जीत के साथ भारत ने तीसरी बार टी20 विश्व कप जीतकर एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया।

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