Monday, February 23, 2026
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100 विधायक लो और एक हफ्ते में सीएम बन जाओ… अखिलेश यादव ने किसे दिया ये खुला ऑफर?

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने यूपी के दोनों डिप्टी सीएम को 100 विधायक लाकर मुख्यमंत्री बनने का खुला ऑफर दिया। गोरखपुर घटना और शंकराचार्य मुद्दे पर योगी सरकार को घेरा।

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Akhilesh Yadav ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री (Akhilesh Yadav) ने प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम को खुला ऑफर देते हुए कहा कि अगर वे 100 विधायक लेकर आ जाएं तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपना ऑफर फिर से दोहरा रहे हैं—100 विधायक लाओ और मुख्यमंत्री बन जाओ। जो 100 विधायक साथ लाएगा, वह एक हफ्ते के लिए मुख्यमंत्री बनेगा।” इस बयान को राजनीतिक गलियारों में भाजपा के भीतर कथित अंतर्कलह पर तंज के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को लेकर भी चर्चाएं हैं। सपा प्रमुख ने इशारों-इशारों में कहा कि एक सप्ताह की बात इसलिए कही गई है क्योंकि मुख्यमंत्री कुछ दिनों के लिए विदेश यात्रा पर जा रहे हैं।

गोरखपुर घटना को लेकर सरकार पर हमला

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने गोरखपुर में इलाज के दौरान कथित लापरवाही से 19 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटना को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि जब प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मूलभूत सवाल खड़े हैं, तब सरकार आंतरिक राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब भी देगी। सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार इन पर खुलकर चर्चा करने से बच रही है।

शंकराचार्य प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया

Yogi Adityanath सरकार को घेरते हुए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शंकराचार्य से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोके जाने की घटना अभूतपूर्व है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार 20 साल पुरानी घटना को सामने लाकर धार्मिक नेतृत्व को अपमानित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर शिकायतकर्ता किसी प्रमुख धार्मिक गुरु का शिष्य है, तो पहले की गई कानूनी कार्रवाई पर उन्हें पुनर्विचार करना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत में एक मुकदमा वापस लेने का फैसला उनकी गलती हो सकती है। अखिलेश यादव ने कहा कि विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस स्तर तक जाना सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अब नैतिक आधार खो चुकी है और जनता के बीच उसकी साख कमजोर हो रही है।

सियासी संदेश या रणनीतिक चाल?

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का यह बयान सिर्फ तंज नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश भी है। एक ओर उन्होंने भाजपा के भीतर संभावित मतभेदों की ओर इशारा किया, वहीं दूसरी ओर अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश की कि सपा सरकार बनाने के लिए तैयार है। उनका 100 विधायकों वाला प्रस्ताव भले ही व्यावहारिक रूप से संभव न दिखे, लेकिन यह बयान सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है। सपा कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और विपक्ष उसकी आवाज बनकर खड़ा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी का दौर तेज होने की संभावना है, और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखे हो सकते हैं।

 

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