ठाणे महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जिस वार्ड को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, वहीं उनकी शिवसेना को करारी हार का सामना करना पड़ा। वार्ड नंबर 13-अ, जहां एकनाथ शिंदे स्वयं रहते हैं, वहां उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवार शाहजी खुपसे ने जीत दर्ज की है। उन्होंने शिवसेना के उम्मीदवार और पूर्व मेयर अशोक वैती को 667 वोटों के अंतर से हराया। यह नतीजा केवल एक वार्ड की हार नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शिंदे गुट की साख पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह संदेश गया है कि ठाणे जैसे मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में भी मतदाता अब बदलाव के मूड में हैं। इस हार ने साफ कर दिया है कि नगर निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दे और संगठन की जमीनी पकड़ बेहद अहम साबित हो रही है।
ठाणे महानगरपालिका के रुझान और बदलता सियासी संतुलन
ठाणे महानगरपालिका में कुल 131 वार्ड हैं और इसे लंबे समय से एकनाथ शिंदे की राजनीति का केंद्र माना जाता रहा है। शुरुआती रुझानों के मुताबिक, बीजेपी गठबंधन 44 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अजित पवार की एनसीपी पांच सीटों पर आगे दिख रही है और अन्य दलों व निर्दलीयों के खाते में करीब 10 सीटें जाती नजर आ रही हैं। हालांकि आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं, लेकिन वार्ड 13-अ का परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नतीजा आने वाले समय में शिवसेना की आंतरिक राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर असर डाल सकता है। ठाणे जैसे शहर में हार यह संकेत देती है कि मतदाता केवल बड़े नामों पर नहीं, बल्कि स्थानीय कामकाज और उम्मीदवार की पकड़ पर भी फैसला कर रहे हैं।
2017 से 2026 तक, ठाणे की राजनीति में कितना बदला समीकरण
अगर पिछले चुनावों की बात करें तो 2017 के ठाणे महानगरपालिका चुनाव में तस्वीर कुछ और ही थी। उस समय अविभाजित एनसीपी ने 35 सीटों पर जीत हासिल की थी, बीजेपी को 23 सीटें मिली थीं और कांग्रेस ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके अलावा AIMIM ने दो सीटें जीती थीं और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। उस दौर में शिवसेना की स्थिति अलग थी और पार्टी एकजुट नजर आती थी। लेकिन 2026 आते-आते राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। शिवसेना का विभाजन, नए गठबंधन और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का असर अब जमीनी चुनावों में साफ दिखाई देने लगा है। ठाणे जैसे शहर में, जहां संगठन की पकड़ मजबूत मानी जाती थी, वहां हार यह बताती है कि मतदाता अब पुराने समीकरणों से हटकर नए विकल्पों को आजमा रहे हैं।
मतदान प्रतिशत और नतीजों के सियासी मायने
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को हुए नगर निकाय चुनावों में कुल 54.77 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। ठाणे महानगरपालिका में 55.59 फीसदी मतदाताओं ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, कुछ नगर निगमों में मतदान प्रतिशत काफी उत्साहजनक रहा, जबकि कुछ जगहों पर अपेक्षाकृत कम मतदान देखा गया। ठाणे में मध्यम स्तर की वोटिंग के बावजूद नतीजों ने बड़ा संदेश दिया है। जानकारों का कहना है कि शिंदे के गृह क्षेत्र में हार भविष्य की राजनीति के लिए संकेतक हो सकती है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले यह परिणाम सभी दलों के लिए सबक है कि स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार की छवि और संगठन की सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ठाणे के नतीजे यह भी दिखाते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में अब मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है।
