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पालम में बिछी थीं लाशें, अपनों के खून से सनी थी जमीन; तभी सांत्वना देने पहुँचे नेता आपस में भिड़े! फिर…

दिल्ली के पालम अग्निकांड के पीड़ितों से मिलने पहुँचे बीजेपी और आप (AAP) कार्यकर्ता आपस में भिड़े। 9 मौतों के मातम के बीच जमकर चले लात-घूंसे।

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देश की राजधानी दिल्ली का पालम इलाका गुरुवार को उस वक्त दहल उठा जब एक भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिससे पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ था। लेकिन इस दुखद घड़ी में संवेदना जताने पहुँचे राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जो किया, उसने पूरी दिल्ली को शर्मसार कर दिया है। शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता आपस में इस कदर भिड़ गए कि घटनास्थल एक अखाड़े में तब्दील हो गया। जिस जमीन पर अभी पीड़ितों के आंसू भी नहीं सूखे थे, वहाँ सरेआम लात-घूंसे चले और जमकर गाली-गलौज हुई। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हो गई है?

सांत्वना की जगह सियासत: कैसे शुरू हुई भिड़ंत?

घटना की शुरुआत तब हुई जब दोनों पार्टियों के स्थानीय नेता भारी संख्या में अपने समर्थकों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। शुरू में सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही आग लगने के कारणों और प्रशासन की लापरवाही पर चर्चा शुरू हुई, माहौल गरमा गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली सरकार और दमकल विभाग की मुस्तैदी पर सवाल उठाए, तो वहीं ‘आप’ समर्थकों ने केंद्र के अधीन आने वाले विभागों की घेराबंदी शुरू कर दी। देखते ही देखते यह बहस व्यक्तिगत छींटाकशी में बदल गई। सस्पेंस और तनाव तब चरम पर पहुँच गया जब एक कार्यकर्ता ने दूसरे दल के नेता को धक्का दे दिया। इसके बाद तो जैसे मर्यादा की सारी सीमाएं टूट गईं और घटनास्थल पर मौजूद भारी पुलिस बल के सामने ही कार्यकर्ता एक-दूसरे पर टूट पड़े।

9 मौतों का मातम और बेबस खड़े पीड़ित परिवार

एक तरफ जहाँ पीड़ितों के घरों से चीख-पुकार सुनाई दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ नेताओं की नारेबाजी और हंगामे ने माहौल को और भी भयावह बना दिया। जिन लोगों ने अपने जिगर के टुकड़ों को खोया था, वे खुद दंग थे कि आखिर उनकी पीड़ा से ज्यादा जरूरी इन लोगों के लिए अपना राजनीतिक वर्चस्व कैसे हो सकता है? पीड़ितों ने आरोप लगाया कि नेता यहाँ उनकी मदद करने नहीं, बल्कि कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आए थे। स्थानीय लोगों का गुस्सा तब फूट पड़ा जब हंगामे के कारण राहत कार्यों और घायलों को शिफ्ट करने में बाधा आने लगी। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए लाठियां पटकनी पड़ीं और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को अलग किया गया।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर और प्रशासन की चुप्पी

इस शर्मनाक झड़प के बाद भी राजनीति थमी नहीं है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि ‘आप’ कार्यकर्ताओं ने उनके नेताओं के साथ बदसलूकी की है, जबकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि बीजेपी ने जानबूझकर शोक के माहौल को बिगाड़ने के लिए हंगामा किया। इस बीच, पालम अग्निकांड की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन इस राजनीतिक ‘दंगल’ ने असली मुद्दे को पीछे धकेल दिया है। सवाल यह है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण जो 9 जानें गई हैं, उनका जिम्मेदार कौन है? दिल्ली के इस हाई-प्रोफाइल अग्निकांड के बाद अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि मारपीट करने वाले कार्यकर्ताओं की पहचान की जा सके और उन पर कानूनी कार्रवाई हो सके।

इंसानियत पर भारी पड़ती राजनीति का कड़वा सच

पालम की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन लोगों के दिलों में गुस्सा उबल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिल्ली की सियासत अब इस स्तर पर पहुँच गई है कि लाशों पर भी राजनीति करने से गुरेज नहीं किया जाता। यह घटना केवल एक झड़प नहीं है, बल्कि एक कड़ा संदेश है कि जनता अब ऐसे खोखले दिखावे से ऊब चुकी है। आने वाले समय में यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति में और गरमा सकता है, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल उन 9 परिवारों का है, जिनका सब कुछ राख हो चुका है और जिन्हें न्याय की जगह केवल नेताओं का तमाशा देखने को मिल रहा है। प्रशासन के लिए अब चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि ऐसी संवेदनशील जगहों पर राजनीतिक गिद्धों को रोकने की भी है।

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