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सियासत की दूरियां पिघलीं? तेजस्वी से मिले तेजप्रताप यादव, भतीजी को गोद में लेकर दिया खास न्योता

आरजेडी से अलग होने के बाद पहली बार तेजप्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव से मिले। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का न्योता, लालू परिवार की मुलाकात ने सियासी संकेत बढ़ाए।

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मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में उस समय भावनात्मक तस्वीर सामने आई, जब लंबे समय बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्य एक ही छत के नीचे नजर आए। मंगलवार 13 जनवरी को तेजप्रताप यादव पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव से मुलाकात की। आरजेडी से निकाले जाने के बाद यह पहला मौका था जब तेजप्रताप और तेजस्वी आमने-सामने दिखे। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में काफी चर्चा रही, क्योंकि बीते कुछ वर्षों से दोनों भाइयों के बीच रिश्तों में तल्खी की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि इस बार माहौल पूरी तरह पारिवारिक और सहज नजर आया, जहां राजनीति से ज्यादा रिश्तों की गर्माहट दिखाई दी।

भतीजी कात्यायनी के साथ बिताया पल, तस्वीरों ने बटोरी सुर्खियां

इस मुलाकात का सबसे भावुक पल तब देखने को मिला, जब तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव की बेटी कात्यायनी को गोद में उठाकर दुलार किया। तेजप्रताप ने इस पल को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया, जिसके बाद तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं। तस्वीरों में तेजप्रताप, तेजस्वी और पूरा परिवार मुस्कुराता नजर आया, जिसने समर्थकों और आम लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए। लोगों ने इसे सिर्फ एक पारिवारिक मुलाकात नहीं, बल्कि रिश्तों में आई नरमी के तौर पर देखा। तेजप्रताप के समर्थकों का कहना है कि यह मुलाकात बताती है कि तमाम सियासी मतभेदों के बावजूद परिवार का रिश्ता अब भी मजबूत है। वहीं कुछ राजनीतिक जानकार इसे आने वाले समय में बड़े सियासी घटनाक्रम का संकेत भी मान रहे हैं।

दही-चूड़ा भोज का ‘ऐतिहासिक’ न्योता, तेजप्रताप का संदेश

तेजप्रताप यादव ने इस मुलाकात के दौरान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज का न्योता अपने परिवार को दिया। उन्होंने इसे ‘ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज’ बताते हुए खास अंदाज में निमंत्रण दिया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने पोस्ट में तेजप्रताप ने लिखा कि उन्होंने अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया और अपने छोटे भाई तेजस्वी से भी भेंट कर उन्हें इस विशेष कार्यक्रम का निमंत्रण दिया। तेजप्रताप के शब्दों में यह संदेश साफ झलकता है कि वह इस आयोजन को केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक खास सामाजिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज का अपना अलग महत्व रहा है, और ऐसे आयोजनों को अक्सर शक्ति प्रदर्शन और मेल-मिलाप के मंच के रूप में देखा जाता है।

पार्टी, चुनाव और अलग राह, फिर भी संपर्क में तेजप्रताप

गौरतलब है कि आरजेडी से बाहर होने के बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की। उन्होंने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई और इसी के बैनर तले महुआ विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर रहे। इससे पहले 2020 में वह हसनपुर सीट से विधायक चुने गए थे, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीट बदलने का फैसला किया। उस चुनाव में आरजेडी ने भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा था, जिससे पारिवारिक और राजनीतिक दूरी और गहरी होती दिखी। इसके बावजूद अब तेजप्रताप द्वारा बिहार सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं को दही-चूड़ा भोज का न्योता देना यह संकेत देता है कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, रामकृपाल यादव, अशोक चौधरी सहित कई नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया। तेजस्वी से हुई यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब बिहार की राजनीति नए समीकरणों की ओर बढ़ रही है, और ऐसे में यह तस्वीर आने वाले दिनों में कई बड़े राजनीतिक संकेत दे सकती है।

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