मेरठ के चर्चित नीला ड्रम सौरभ हत्याकांड में जेल में बंद मुस्कान की जिंदगी मां बनने के बाद पूरी तरह बदल गई है। कुछ महीनों पहले तक जो मुस्कान गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में थी, वही आज अपनी मासूम बच्ची को गोद में लिए घंटेभर बैठी रहती है। जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मुस्कान दिनभर अपनी बेटी को सीने से लगाए रखती है और उसके खाने-पीने, आराम और देखभाल में पूरी तरह डूबी रहती है।
मुस्कान का यह बदला हुआ रूप जेल के कर्मचारियों को भी हैरान करता है। कई बार वह अपनी बच्ची के लिए खुद खाना बनाने तक की इच्छा जताती है। जेल प्रशासन का कहना है कि मां बनने के बाद उसकी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं।
महिला बैरक में बच्चों के लिए विशेष इंतजाम
जिस बैरक में मुस्कान रहती है, वहां चार अन्य महिला बंदियां भी हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं। जेल प्रशासन ने इन महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध करा रखी हैं। बच्चों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दूध, गर्म कपड़े, पोषण और समय-समय पर मिलने वाली चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की जाती हैं।
जेल में महिला बंदियों के लिए एक अलग वॉर्ड बनाया गया है जहां बच्चों के लिए आरामदायक पलंग, खेलने की छोटी जगह और माताओं के लिए आवश्यक सामान रखा गया है। जेल अधीक्षक का कहना है कि बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, यह उनकी पहली प्राथमिकता है। इसलिए यहां नियमित रूप से डॉक्टरों की टीम भी आती है और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती है।
साहिल ने जताई बच्ची से मिलने की इच्छा
मुस्कान के साथ गिरफ्तार साहिल ने भी अपनी नवजात बेटी से मिलने की इच्छा जताई है। जेल प्रशासन के पास उसका आवेदन पहुंचा है और इस संबंध में कानून के तहत संभव विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, साहिल अपनी बेटी को देखकर भावुक हो गया और उसने कहा कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वह अपनी बच्ची से एक बार मिलना चाहता है। जेल अधिकारी बताते हैं कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन करते हुए मानवीय आधार पर निर्णय लिया जाता है। अगर सुरक्षा और नियमों के हिसाब से अनुमति मिलती है, तो मुलाकात की व्यवस्था की जा सकती है।
जेल में इंसानियत की नई तस्वीर
मुस्कान की बदलती जिंदगी यह दिखाती है कि जेल की कठोर दीवारों के बीच भी इंसानियत और भावनाएं मौजूद रहती हैं। महिला बैरक में रहने वाली अन्य बंदियां भी आपस में मिलकर बच्चों की देखभाल में सहयोग करती हैं। बच्चों के रोने पर सभी मिलकर उन्हें शांत कराती हैं—यह माहौल जेल में अलग ही संवेदना पैदा करता है।
जेल प्रशासन का कहना है कि चाहे बंदी किसी भी अपराध में क्यों न हो, लेकिन बच्चा कभी दोषी नहीं होता। यही वजह है कि यहां बच्चों की परवरिश को लेकर अत्यधिक संवेदनशीलता दिखाई जाती है। मुस्कान की बेटी भी इन्हीं व्यवस्थाओं के बीच पूरी देखभाल पाकर बढ़ रही है और मुस्कान भी दिन-ब-दिन अपने नए रोल में ढलती जा रही है।
