बिहार politiques एक बार फिर गर्म है और चर्चा के केंद्र में हैं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा। बेटे दीपक प्रकाश की सीधे मंत्री के रूप में शपथ के बाद विरोधियों ने उन पर परिवारवाद का गंभीर आरोप लगाया था। अब कुशवाहा ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, बल्कि ऐसा कदम था जिसे उठाते वक्त उन्हें “जहर पीने” जैसा महसूस हुआ। उनका कहना है कि पार्टी को टूटने से बचाने के लिए यह कड़ा फैसला लेना जरूरी था।
उपेंद्र कुशवाहा ने बताई असली मजबूरी
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बयान में पुराने घटनाक्रम का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी ने पहले ही कई मुश्किल दौर देखे हैं। एक गलत फैसला पार्टी को लगभग खत्म कर चुका था, इसलिए इस बार वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आलोचनाएं चाहे कितनी भी आएं, लेकिन राजनीति में कुछ फैसले अपनी लोकप्रियता से ऊपर उठकर लेने पड़ते हैं। कुशवाहा का दावा है कि अगर यह कदम नहीं उठाया जाता तो पार्टी एक बार फिर राजनीतिक नक्शे से गायब हो सकती थी।
बेटे को मंत्री बनाने के पीछे क्या थी रणनीति?
यह विवाद तब उभरा जब 20 नवंबर को उनका बेटा दीपक प्रकाश, न विधायक और न एमएलसी होते हुए सीधे मंत्री के रूप में शपथ ले गया। जबकि उनकी पत्नी स्नेह लता कुशवाहा पहले से विधायक हैं। इसी वजह से सवाल उठे कि आखिर परिवार का कौन-सा सदस्य मंत्री होना चाहिए था? उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह फैसला किसी रिश्तेदारी के आधार पर नहीं, बल्कि पार्टी की मजबूरी और राजनीतिक गणित के आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2025 के चुनाव में जो संघर्ष करके सीटें जीतीं, उन्हें बचाने के लिए यह कदम आवश्यक था ।
दीपक प्रकाश पर कुशवाहा का भरोसा
उपेंद्र कुशवाहा ने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कई लोगों को शिकायत फैसले से नहीं, बल्कि इस बात से है कि वे “अब भी राजनीति में जीवित” हैं। उन्होंने कहा कि दीपक प्रकाश किसी विरासत के भरोसे नहीं, बल्कि पढ़ाई और मेहनत से यहां तक आया है। उसने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है और योग्यता के आधार पर वह खुद को साबित करेगा। कुशवाहा ने अपील की कि उसे समय दिया जाए और उसके काम को देखा जाए, न कि उसकी परिवारिक पहचान को।
