संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ हुई, जिसमें उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को साफ शब्दों में रखा। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर चलते हुए देश के हर वर्ग के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल 25 करोड़ लोगों तक सीमित था, लेकिन आज यह दायरा बढ़कर करीब 95 करोड़ नागरिकों तक पहुंच चुका है। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचे।
समानता और सामाजिक न्याय का संदेश: बाबा साहेब अंबेडकर का उल्लेख क्यों अहम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय को देश की नींव माना। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकारों का उपयोग करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब हर व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार और सम्मान के समान अवसर मिलें। राष्ट्रपति के इस बयान को मौजूदा शैक्षणिक और सामाजिक बहसों से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब UGC के नए नियमों को लेकर देश के कई हिस्सों में चर्चा और विरोध का माहौल बना हुआ है।
UGC नियमों का अप्रत्यक्ष जिक्र: संवेदनशीलता का संकेत या सियासी संतुलन
हालांकि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन सामाजिक न्याय, समानता और संवेदनशील शासन पर दिए गए उनके जोर को कई विशेषज्ञ UGC विवाद से जोड़कर देख रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, वंचितों और आदिवासी समुदायों के हितों की पूरी संवेदनशीलता के साथ रक्षा कर रही है। इसी बयान को शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और भेदभाव खत्म करने की दिशा में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह संदेश सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें किसी भी नीति या नियम को लागू करते समय समाज के सभी वर्गों के हितों को संतुलित करना प्राथमिकता है।
गरीबी उन्मूलन और पारदर्शिता: सरकार के तीसरे कार्यकाल का रोडमैप
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति ने सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले एक दशक में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान और तेज गति से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो। उनके अनुसार, यही भरोसा किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है। राष्ट्रपति के इस पूरे संबोधन को न सिर्फ सरकार की उपलब्धियों के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि आने वाले समय में शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता से जुड़े फैसलों के संकेत के तौर पर भी माना जा रहा है।
