Sunday, February 1, 2026
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अजित दादा चले गए… फूट- फूटकर रोती दिखी सुप्रिया सुले, वायरल हुआ भावुक वीडियो

अजित पवार के निधन से बारामती में मातम पसरा है। सुप्रिया सुले फूट-फूटकर रोती नजर आईं। प्लेन क्रैश के बाद पूरे पवार परिवार में शोक, अंतिम संस्कार की तैयारी और तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की पूरी जानकारी पढ़ें।

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बारामती एक बार फिर इतिहास के सबसे भारी पलों से गुजर रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले अजित पवार के आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। जैसे ही प्लेन क्रैश में उनके निधन की पुष्टि हुई, बारामती में सन्नाटा छा गया। बाजारों के शटर गिर गए, लोगों की आवाजें थम गईं और हर चेहरे पर अविश्वास साफ झलकने लगा। इस दुखद मौके पर सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब अजित पवार की चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। वर्षों से “दादा” कहकर पुकारने वाली सुप्रिया, भाई के जाने के बाद पूरी तरह टूटती नजर आईं। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और समर्थक उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन दर्द ऐसा था कि शब्द भी छोटे पड़ गए।

सुप्रिया सुले का फूट-फूटकर रोना

बारामती पहुंचते ही सुप्रिया सुले सीधे भाभी सुनेत्रा पवार के साथ वहां मौजूद परिजनों के बीच पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने अपने आसपास मौजूद लोगों को देखा, भावनाओं का बांध टूट गया। एक बुजुर्ग रिश्तेदार के गले लगकर सुप्रिया सुले फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी आंखों से बहते आंसू सिर्फ निजी दुख नहीं, बल्कि एक ऐसे रिश्ते की गहराई को दिखा रहे थे, जो राजनीतिक मतभेदों से हमेशा ऊपर रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि सुप्रिया बार-बार यही कहती सुनी गईं कि अजित दादा उनके लिए सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि मार्गदर्शक भी थे। इस भावुक पल का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इसे देखकर अपनी संवेदनाएं जाहिर कीं।

राजनीतिक दूरियों के बावजूद बना रहा पारिवारिक रिश्ता

अजित पवार और शरद पवार के बीच राजनीतिक मतभेदों के चलते परिवार दो गुटों में बंटा जरूर नजर आया, लेकिन रिश्तों की डोर कभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ी। सुप्रिया सुले इस दौरान हमेशा संतुलित और सम्मानजनक रुख में दिखीं। उन्होंने कभी भी सार्वजनिक मंच से अजित पवार के खिलाफ तल्ख बयान नहीं दिए। हाल के महीनों में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान दोनों एनसीपी गुटों का कई जगहों पर साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि परिवार और राजनीति के बीच दूरियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। अजित पवार खुद भी निजी बातचीत में पारिवारिक एकता की बात करते रहे थे। ऐसे में उनका अचानक चला जाना सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

तीन दिन का शोक, बारामती में अंतिम संस्कार की तैयारी

अजित पवार के निधन के बाद राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन के शोक की घोषणा की है। सरकारी इमारतों पर तिरंगा आधा झुका दिया गया है। बारामती में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हजारों समर्थकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जानकारी के अनुसार, अजित पवार का अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए लोगों की लंबी कतारें लगने लगी हैं। समर्थकों का कहना है कि अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े जनसेवक थे। आज जब वह नहीं रहे, तो उनकी कमी हर उस व्यक्ति को महसूस हो रही है, जिसने कभी उनसे उम्मीद लगाई थी। सुप्रिया सुले और पूरा पवार परिवार इस दुख की घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनकर खड़ा है।

 

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