महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका, जिसके बाद सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। इस मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री Smriti Irani ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इतने अहम मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई, बल्कि बिल गिरने के बाद खुशी जाहिर की। ईरानी ने इसे महिलाओं के साथ “धोखा” बताते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस व्यवहार को कभी माफ नहीं करेंगी। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में इस बिल को लेकर गहरी राजनीतिक खींचतान देखने को मिली।
“98 साल का वादा, लेकिन नतीजा शून्य”—कांग्रेस पर आरोप
स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने कांग्रेस के इतिहास और उसके दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से महिला आरक्षण का श्रेय लेने की कोशिश करती रही है, लेकिन इतने वर्षों में इसे लागू नहीं कर पाई। उनके मुताबिक, संसद में जो घटनाएं हुईं, उन्होंने यह साफ कर दिया कि विपक्ष की मंशा क्या है। स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने आरोप लगाया कि जब सदन में बिल पर चर्चा हो रही थी, तब कुछ विपक्षी नेताओं ने तालियां बजाईं और मेज थपथपाई, जो इस बात का संकेत है कि वे इस बिल के पास न होने से संतुष्ट थे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है।
लोकसभा में क्यों नहीं पास हो पाया बिल?
महिला आरक्षण से जुड़ा यह संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। वोटिंग के दौरान 298 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन बिल को पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हो सकी। इस कारण यह विधेयक गिर गया। इस बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना और लोकसभा की सीटों की संख्या में बढ़ोतरी करना था। हालांकि, राजनीतिक मतभेदों के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।
प्रियंका गांधी पर भी निशाना, आगे क्या?
स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi Vadra पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट समर्थन नहीं दिखा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि सामान्य या पिछड़े वर्ग की महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ें। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विपक्ष को वास्तव में महिलाओं की चिंता थी, तो सीट बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन क्यों नहीं किया गया। ईरानी के अनुसार, सरकार ने ऐसा समाधान देने की कोशिश की जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़े और मौजूदा प्रतिनिधित्व पर भी असर न पड़े। अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बिल को दोबारा लाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है और विपक्ष का रुख क्या रहता है।
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