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BJP का राहुल गांधी की घर के बाहर भयंकर विरोध प्रदर्शन, महिला आरक्षण बिल से भड़का विवाद

महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद दिल्ली की सड़कों पर संग्राम छिड़ गया है। बीजेपी ने राहुल गांधी के आवास का घेराव किया, वॉटर कैनन चली और भारी हंगामा हुआ। क्या यह 2026 के चुनावों का रुख बदल देगा? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

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केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ (संशोधन विधेयक) लोकसभा में बहुमत न मिलने के कारण गिर गया है। बिल के गिरते ही देश की राजधानी दिल्ली रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। BJP की महिला विंग और नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सरकारी आवास का घेराव किया। प्रदर्शन इतना उग्र था कि प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का पुतला फूँका और काले झंडे दिखाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए दिल्ली पुलिस को भारी बल प्रयोग करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें करनी पड़ीं।

सीएम रेखा गुप्ता का तीखा हमला

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हार को देश की आधी आबादी के साथ सबसे बड़ा धोखा करार दिया है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि पिछले तीन दशकों से महिलाएं अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन हर बार विपक्ष किसी न किसी बहाने से उनके सपनों का गला घोंट देता है। उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर विपक्ष को महिलाओं के आरक्षण से इतनी चिढ़ क्यों है? रेखा गुप्ता ने सवाल उठाया कि कभी परिसीमन का बहाना, कभी कोटा के अंदर कोटे की मांग और कभी उत्तर-दक्षिण का विवाद खड़ा करके विपक्ष ने केवल वक्त बर्बाद किया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जो लोग आज मुस्लिम महिलाओं की दुहाई दे रहे हैं, उन्होंने ही ‘तीन तलाक’ बिल का पुरजोर विरोध किया था।

बांसुरी स्वराज की चेतावनी

BJP सांसद और प्रखर वक्ता बांसुरी स्वराज ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दलों के लिए महिलाएं केवल एक चुनावी वोट बैंक बनकर रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संसद में सत्ता की भागीदारी और संवैधानिक हक देने की बारी आई, तो विपक्ष ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। स्वराज के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष द्वारा दिए गए तर्क सिर्फ एक राजनीतिक पैंतरा थे ताकि बिल को लटकाया जा सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब देश की मातृशक्ति चुप नहीं बैठेगी। कल सदन में जो विश्वासघात हुआ है, उसका जवाब महिलाएं आने वाले समय में अपने आक्रोश से देंगी। बीजेपी का मानना है कि विपक्ष महिलाओं को केवल मतदान केंद्रों तक सीमित रखना चाहता है, उन्हें नीति निर्धारण में शामिल नहीं करना चाहता।

क्या होगा महिला आरक्षण का अगला पड़ाव?

महिला आरक्षण बिल का गिरना केवल एक विधायी असफलता नहीं है, बल्कि इसने 2026 की राजनीतिक जमीन को पूरी तरह से गरमा दिया है।  इस बिल के गिरने के बाद अब बीजेपी इसे पूरे देश में एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में ले जाएगी। सड़क पर उतरी महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं जब तक महिलाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिल जाता। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष के पास अब अपनी बात साबित करने की चुनौती होगी कि उन्होंने किन तकनीकी कारणों से इसका विरोध किया। फिलहाल, दिल्ली की फिजाओं में गूंजते ‘मुर्दाबाद’ के नारे और वॉटर कैनन की बौछारें साफ संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिन भारतीय राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे होने वाले हैं।

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