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अखिलेश की रणनीति क्यों फेल हुई? महाराष्ट्र में ओवैसी की AIMIM ने कर दिया बड़ा खेल, सपा को उसी के गढ़ में हराया

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महाराष्ट्र में मुंबई समेत 29 नगर निगम चुनावों के नतीजे सामने आते ही राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी गठबंधन सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है, वहीं इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की रही। नगर निगम चुनावों में AIMIM ने ऐसी जगहों पर जीत दर्ज की है, जहां पहले उसकी मौजूदगी सीमित मानी जाती थी। 29 में से 13 नगर निगमों में AIMIM के कुल 95 उम्मीदवारों की जीत ने सभी को चौंका दिया है। यह प्रदर्शन न केवल पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि महाराष्ट्र की अल्पसंख्यक राजनीति में भी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। खास बात यह रही कि AIMIM ने उन इलाकों में भी पकड़ बनाई, जहां समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल खुद को मजबूत मानते थे।

मुंबई में AIMIM की ज़ोरदार एंट्री

इन चुनावों में AIMIM की सबसे बड़ी सफलता मुंबई में देखी गई है। देश की आर्थिक राजधानी में AIMIM ने कई वार्डों में जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया कि पार्टी अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक सिमटी नहीं है। मानखुर्द जैसे इलाके, जिसे समाजवादी पार्टी के नेता और विधायक अबू आज़मी का गढ़ माना जाता है, वहां AIMIM की जीत ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। AIMIM के जीतने वाले उम्मीदवारों में मेहजबीन खान, जमीर कुरैशी, समीर पटेल, रोशन शेख, शबाना शेख और खैरुनिशा हुसैन जैसे नाम शामिल हैं। इन जीतों ने साफ संकेत दिया है कि मुंबई के शहरी मतदाताओं में AIMIM ने अपनी अलग पहचान बना ली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल पार्षदों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राजनीति के लिए पार्टी की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

संभाजीनगर और मालेगांव में AIMIM का दबदबा

छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम चुनाव AIMIM के लिए सबसे बड़ी सफलता लेकर आए हैं। यहां पार्टी ने 24 सीटें जीतकर खुद को दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित किया है। संभाजीनगर में उम्मीदवार चयन को लेकर विवाद और हंगामे की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन इसके बावजूद AIMIM का प्रदर्शन मजबूत रहा। मालेगांव में भी AIMIM ने 20 सीटें जीतकर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। इसके अलावा सोलापुर, धुले और नांदेड़ में 8-8 पार्षदों की जीत ने पार्टी के राज्यव्यापी विस्तार को दिखाया है। अमरावती में 6, ठाणे में 5 और नागपुर में 4 पार्षदों की जीत यह बताती है कि AIMIM अब केवल कुछ खास शहरों तक सीमित नहीं रही। चंद्रपुर जैसे नए इलाकों में जीत दर्ज करना भी पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

समाजवादी पार्टी को झटका, बदली राजनीति की दिशा

इन चुनावों में सबसे बड़ा नुकसान समाजवादी पार्टी को हुआ है। AIMIM ने सीधे तौर पर सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई है, खासकर मुंबई के मानखुर्द इलाके में मिली जीत ने अबू आज़मी की राजनीति को झटका दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्यभर में रैलियां और बैठकों के जरिए मजबूत माहौल बनाया था। हालांकि इस दौरान अकोला में हंगामा और संभाजीनगर में इम्तियाज जलील पर हमले की कोशिश जैसी घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन इन विवादों का चुनावी नतीजों पर खास असर नहीं पड़ा। उल्टा, AIMIM को इन सबके बावजूद बड़ी सफलता मिली। इन नतीजों से साफ है कि महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां पुराने समीकरण टूट रहे हैं और नई ताकतें उभरकर सामने आ रही हैं।

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