Monday, February 2, 2026
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‘फैक्ट हैं तो बहस के लिए आइए…’ बजट 2026 के बाद निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को दी खुली चुनौती, जानिए किस मुद्दे पर गरमाई सियासत

Budget 2026 पर सियासत तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए फैक्ट के साथ डिबेट की चुनौती दी। जानिए बजट, रोजगार, अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर मिशन और रेयर अर्थ कॉरिडोर से जुड़े बड़े दावे।

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Union Budget 2026 पेश होने के साथ ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के तमाम नेताओं ने बजट को दूरदर्शी और विकासोन्मुख बताया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट को लेकर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह बजट देश के सामने खड़े असली संकटों से आंख मूंदने वाला है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमजोर पड़ रहा है और निवेशक भारत से पूंजी निकाल रहे हैं।
इन आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधा जवाब देते हुए राहुल गांधी को खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक बयानबाजी करना आसान है, लेकिन अगर किसी के पास ठोस फैक्ट हैं तो उन्हें सामने रखा जाए। उनका कहना था कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर और मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है और बजट 2026 उसी दिशा में एक अहम कदम है।

रोजगार और MSME पर सरकार का जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कई देशों को आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों के बीच भी अपनी विकास गति को बनाए रखा है। बजट 2026 में उन सेक्टर्स पर खास ध्यान दिया गया है, जहां अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
सीतारमण ने कहा कि छोटे और मझोले उद्योगों यानी MSME सेक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए कई नई योजनाएं लाई गई हैं। इन योजनाओं का मकसद सिर्फ आर्थिक ग्रोथ नहीं, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। वित्त मंत्री के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम आदमी को वैश्विक अस्थिरता का सीधा नुकसान न उठाना पड़े और उनकी आय व जीवन स्तर सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्ट्रक्चरल सुधारों पर लगातार काम कर रही है, जिससे लंबे समय में रोजगार और उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी हो सके।

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बजट 2026 को लेकर कहा कि सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को लगे वैश्विक झटकों को नजरअंदाज किया है। उनका आरोप है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, घरेलू बचत में कमी आ रही है और किसान पहले से ही संकट में हैं। राहुल गांधी के मुताबिक यह बजट उन समस्याओं को हल करने के बजाय सिर्फ आंकड़ों और दावों तक सीमित है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर वह रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। राहुल गांधी के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई। विपक्ष का कहना है कि सरकार को आत्ममंथन करने की जरूरत है, जबकि सत्ता पक्ष बजट को भविष्य की मजबूत नींव बता रहा है। इसी टकराव के बीच निर्मला सीतारमण का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अगर उनके पास कोई ठोस तथ्य हैं तो वह उन्हें सामने रखें और बहस के लिए तैयार रहें।

सेमीकंडक्टर मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव

बजट 2026 में टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को लेकर सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है और भारत को इस दौड़ में आगे रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हर शहर को सालाना 1000 करोड़ रुपये का समर्थन देने की घोषणा की गई है, ताकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।
सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर भी दो अहम घोषणाएं की गई हैं। इंडिया स्टैक और बौद्धिक संपदा से जुड़े ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ 40,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम लाई गई है, जिससे देश को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसके अलावा रेयर अर्थ मटेरियल को लेकर भारत की विदेशी निर्भरता कम करने के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की योजना भी घोषित की गई है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इन कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे मैग्नेट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारत को बाहरी देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और इसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

 

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