प्रसिद्ध संगीतकार और गायक एआर रहमान के एक इंटरव्यू ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए गए इंटरव्यू में एआर रहमान ने दावा किया था कि पिछले करीब आठ सालों से उन्हें हिंदी सिनेमा में पहले जैसा काम नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसका कारण बीते एक दशक में हुए ‘पावर शिफ्ट’ को बताया था। रहमान के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में अब फैसले ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो क्रिएटिव नहीं हैं और इसी वजह से उन्हें पीछे रखा जा रहा है। हालांकि, रहमान ने साफ कहा था कि वह इसे किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देख रहे हैं। इसके बावजूद उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे सिस्टम की आलोचना बताया तो कुछ ने इसे देश और समाज के खिलाफ टिप्पणी के रूप में पेश किया। इसी बयान के बाद महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने तीखी प्रतिक्रिया दी और मामला राजनीति के केंद्र में आ गया।
नितेश राणे का बयान और सियासी घमासान
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे अपने विवादित बयानों के लिए पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। इस बार उन्होंने एआर रहमान के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई। नितेश राणे ने कहा कि जो लोग देश या हिंदू समुदाय का अपमान करते हैं, उन्हें किसी भी तरह का मंच नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर कोई व्यक्ति पाकिस्तान, कराची या बांग्लादेश के खिलाफ इस तरह की बात करता, तो क्या वहां उसे जीने दिया जाता या मार गिराकर देश से बाहर कर दिया जाता। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। विपक्षी दलों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील करार दिया, जबकि समर्थकों का कहना है कि राणे देश और समाज के सम्मान की बात कर रहे हैं। बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी दो धड़े बन गए हैं, जहां एक तरफ मंत्री के बयान की आलोचना हो रही है तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं।
कपिल शर्मा शो पर आपत्ति और ‘डर’ वाली बात
नितेश राणे यहीं नहीं रुके। उन्होंने एआर रहमान के लोकप्रिय टीवी शो ‘द कपिल शर्मा शो’ में आने पर भी सवाल उठाए। राणे ने कहा कि ऐसे लोगों को मनोरंजन के बड़े मंच क्यों दिए जाते हैं, जो कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी बयान देते हैं। उनके मुताबिक, हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन जो लोग देश या हिंदू समुदाय का अपमान करते हैं, उनका सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। राणे ने यहां तक कहा कि समाज में ऐसा डर पैदा करना होगा, ताकि भविष्य में कोई भी देश या हिंदू राष्ट्र के खिलाफ बोलने की हिम्मत न करे। इस बयान के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने कहा कि डर का माहौल लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि सार्वजनिक मंच पर बोलते समय जिम्मेदारी भी जरूरी है।
एआर रहमान की सफाई और बढ़ती बहस
विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान ने भी अपनी बात साफ की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका उद्देश्य किसी समुदाय या देश को ठेस पहुंचाना नहीं था। रहमान ‘द कपिल शर्मा शो’ में भी नजर आए, जहां उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में सफाई दी और कहा कि वह सिर्फ अपने करियर के अनुभव साझा कर रहे थे। इसके बावजूद यह मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने रहमान के समर्थन में कहा कि क्रिएटिव आज़ादी पर सवाल उठाना गलत है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर बयानबाजी जारी है। यह विवाद अब सिर्फ एक कलाकार और मंत्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या इससे कला और राजनीति के रिश्तों पर कोई नया असर पड़ता है।
