आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद राघव चड्ढा के अचानक इस्तीफे और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की खबर ने पूरे राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इस घटनाक्रम के बीच AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल का पहला बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने BJP पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “एक बार फिर पंजाबियों के साथ धोखा हुआ है।” केजरीवाल का यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आया, जहां उन्होंने बिना नाम लिए BJP पर गंभीर आरोप लगाए। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ AAP के भीतर दरार को उजागर किया है, बल्कि विपक्षी राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
राघव चड्ढा का बड़ा दावा
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP छोड़ने के पीछे की वजहों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 15 साल पार्टी को दिए, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, AAP अब वैसी ईमानदार और पारदर्शी राजनीति नहीं कर रही, जैसी शुरुआत में दावा किया गया था। चड्ढा ने यह भी कहा कि वह अकेले नहीं हैं, बल्कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसद उनके साथ पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 10 में से कम से कम 6-7 सांसद उनके समर्थन में हैं और इस संबंध में औपचारिक पत्र राज्यसभा के सभापति को भेज दिया गया है। इस बयान ने AAP के अंदर गहरी असहमति की ओर इशारा किया है।
बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 24, 2026
किन-किन नेताओं ने छोड़ा साथ?
राघव चड्ढा के साथ जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल बताए जा रहे हैं। अगर ये दावा पूरी तरह सही साबित होता है, तो यह AAP के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जाएगा। पार्टी के राज्यसभा में संख्या बल पर इसका सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, अभी तक इन सभी नेताओं की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है, जिससे स्थिति थोड़ी अस्पष्ट बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह टूट औपचारिक रूप ले लेती है, तो यह AAP की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति को कमजोर कर सकती है।
केजरीवाल का पलटवार
अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार देते हुए BJP पर हमला बोला है। उनका कहना है कि विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश लगातार की जा रही है और यह उसी का हिस्सा है। उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की जनता के साथ फिर से विश्वासघात हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP इस संकट से कैसे निपटती है और क्या पार्टी अपने बचे हुए नेताओं को एकजुट रख पाती है या नहीं। दूसरी तरफ BJP के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक मजबूती के तौर पर देखा जा सकता है। कुल मिलाकर, यह मामला आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना रह सकता है।
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