हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने लोकसभा में दिए अपने भाषण से राजनीतिक माहौल गरमा दिया। संविधान संशोधन से जुड़े अहम विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की और उन्हें देश का सबसे बड़ा “फेमिनिस्ट” बताया। कंगना ने कहा कि आज भारत की महिलाएं खुद को पहले से ज्यादा मजबूत और सम्मानित महसूस कर रही हैं, और इसके पीछे प्रधानमंत्री की नीतियों और सोच का बड़ा योगदान है। उनके इस बयान ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस छेड़ दी है कि क्या सच में मौजूदा सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सबसे आगे है।
“महिलाओं में विश्वास दिखाया” Kangana Ranaut का बयान
अपने संबोधन में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं पर भरोसा जताकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की बेटियां आज खुद को सक्षम और सुरक्षित महसूस कर रही हैं। कंगना के अनुसार, यह सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सोच में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का हक देने और उन्हें नेतृत्व की भूमिका में लाने के लिए जो प्रयास हुए हैं, वह पहले कभी इतने व्यापक स्तर पर नहीं दिखे। कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने यह भी कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार लगातार तेजी से कदम उठा रही है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है।
कंगना रनौत ने किया महिला आरक्षण और परिसीमन पर खुलकर समर्थन
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने जिस विधेयक पर चर्चा की, उसका उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाना और महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस प्रस्ताव का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि यह समय की जरूरत है और इससे राजनीति में संतुलन आएगा। साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को भी जरूरी बताते हुए कहा कि बदलती जनसंख्या और सामाजिक ढांचे के अनुसार प्रतिनिधित्व तय होना चाहिए। विपक्ष द्वारा इस विधेयक को जल्दबाजी में लाने की आलोचना पर Kangana Ranaut ने पलटवार किया और कहा कि जब बात महिलाओं के अधिकारों की हो, तो देरी नहीं बल्कि तेजी जरूरी होती है। उनके मुताबिक, सरकार का मकसद स्पष्ट है—महिलाओं को उनका हक दिलाना।
राजनीतिक बहस के बीच बढ़ा सियासी तापमान
Kangana Ranaut के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। जहां सत्तारूढ़ दल उनके बयान को महिलाओं के सशक्तिकरण की सच्चाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे महज राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के मुद्दे पर इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का भी हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि यह भी सच है कि पिछले कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण को लेकर कई योजनाएं और पहलें सामने आई हैं, जिनका असर समाज में दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि संसद में चल रही यह बहस आगे किस दिशा में जाती है और क्या यह विधेयक वास्तव में महिलाओं की भागीदारी को नए स्तर तक पहुंचा पाएगा।
