Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व आज देश भर में बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि एक छोटी सी भूल आपके पूरे पर्व के आनंद को फीका कर सकती है? जी हां, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राखी बांधने का सही समय और नियम बेहद मायने रखते हैं, और यदि इसमें ज़रा सी भी चूक हुई, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव भाई के जीवन पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं आज का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त और राखी बांधने की अचूक विधि।
सुबह से लेकर दोपहर तक के सबसे बड़े और अचूक शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन भद्रा रहित काल में ही राखी बांधना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि पर सुबह 5:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम और अमृतकाल माना गया है। यदि आप सुबह के व्यस्त समय में किसी कारणवश राखी नहीं बांध पाईं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। दोपहर के वक्त पड़ने वाला अभिजीत मुहूर्त भी बेहद श्रेष्ठ माना गया है, जो दोपहर 12:14 बजे से दोपहर 1:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान सही मुहूर्त में किया गया हर काम भाई के जीवन में अपार खुशहाली, तरक्की और दीर्घायु लेकर आता है, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखें।
थाली सजाने के गुप्त नियम और भाई को बैठाने की सही दिशा
राखी की थाली तैयार करना महज़ एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और धार्मिक अनुष्ठान है। पूजा की थाली में राखी, रोली यानी कुमकुम, अक्षत यानी अखंडित चावल, एक पवित्र दीपक और मुंह मीठा करने के लिए शुद्ध मिठाई का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, राखी बांधते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन दिशाओं में मुख करके पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कार्य में शत-प्रतिशत सफलता मिलती है। थाली की हर एक सामग्री का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, जो घर परिवार में सुख, शांति और आपसी प्रेम की नींव को मजबूत करता है।
तिलक और रक्षासूत्र बांधते समय भूलकर भी न करें यह महापाप
पूजा की शुरुआत करते समय सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम या रोली का तिलक लगाएं और उसके तुरंत बाद अखंडित यानी साबुत चावल (अक्षत) लगाएं। इस बात का खास ध्यान रखें कि चावल का एक भी दाना टूटा हुआ नहीं होना चाहिए, क्योंकि टूटे चावल अशुभता का प्रतीक माने जाते हैं। तिलक लगाने से भाई को जीवन में उन्नति और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके पश्चात, भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधते समय “ॐ येन बद्धो बलि राजा…” पवित्र महामंत्र का उच्चारण अवश्य करें। यह प्राचीन मंत्र भाई को हर बुरी बला, नकारात्मक ऊर्जा और संकटों से सुरक्षित रखने का अचूक कवच माना गया है।
आरती और मिठाई खिलाने के बाद ही पूरी होती है रक्षाबंधन की यह पवित्र रीत
राखी बांधने की प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती, इसके बाद बहन को भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ दीपक से आरती उतारनी चाहिए। आरती करने से घर का संपूर्ण वातावरण पवित्र हो जाता है और आसपास की समस्त नकारात्मक शक्तियां स्वतः दूर हो जाती हैं। आरती के उपरांत भाई को बड़े प्यार से अपने हाथों से मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं, जिससे दोनों के बीच का खटास-मीठापन और स्नेह हमेशा प्रगाढ़ बना रहे। शास्त्रों में बताई गई इस संपूर्ण और सटीक विधि से यदि आज आप रक्षाबंधन का त्योहार मनाएंगी, तो न सिर्फ भाई-बहन का रिश्ता अटूट होगा, बल्कि आपके पूरे परिवार में आजीवन सुख, समृद्धि और वैभव का वास रहेगा।
