रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं माना जाता, बल्कि धार्मिक मान्यताओं में इस दिन किए गए कुछ उपायों को भी विशेष महत्व दिया गया है। अगर किसी भाई पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव चल रहा है, तो रक्षाबंधन के दिन कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं।
राखी बांधने से पहले करें ये काम
रक्षाबंधन के दिन बहन सुबह स्नान आदि करने के बाद पूजा की तैयारी कर सकती है। भाई को राखी बांधते समय शुभ रंग के धागे का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि भाई पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव हो तो बहन को काली या नीली राखी की जगह लाल, पीले या केसरिया रंग के रेशमी धागे की राखी बांधनी चाहिए। मान्यता है कि इससे भाई के जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। हालांकि, ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
नारियल से जुड़ा ये उपाय माना जाता है खास
शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए रक्षाबंधन पर नारियल का उपाय भी बताया गया है। इसके लिए बहन राखी बांधने के बाद भाई के सिर के ऊपर से नारियल को सात बार वारकर या उवारकर किसी बहते जल में प्रवाहित कर सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर करने और परेशानियों से राहत मिलने की कामना की जाती है। इस दौरान भाई के सुख, स्वास्थ्य और सफलता के लिए प्रार्थना भी की जा सकती है।
बहन को उपहार देकर लें आशीर्वाद
रक्षाबंधन पर भाई का अपनी बहन को उपहार देना भी परंपरा का हिस्सा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो तो उसे अपनी बहन का सम्मान करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देना चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इसके साथ ही रक्षाबंधन के दिन सुबह सूर्य देव को जल चढ़ाने और भगवान शिव की पूजा करने का भी महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, जल और शक्कर से अभिषेक करने की परंपरा कई जगहों पर मानी जाती है। इसके बाद दीपक जलाकर आरती और फल आदि का भोग लगाया जा सकता है।
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें राखी बांधने का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। दिए गए पंचांग विवरण के मुताबिक, इस दिन राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। भाई-बहन इस दौरान शुभ मुहूर्त में राखी बांधने और पूजा करने की तैयारी कर सकते हैं। शनि की साढ़ेसाती या ढैया से जुड़े उपायों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराएं हैं, इसलिए इन्हें धार्मिक आस्था और मान्यता के तौर पर ही देखना उचित है।
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