नेपाल और चीन सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है कि हर कोई सहम उठा है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 270 तक पहुंच गया है, जबकि हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस भयानक प्रलय के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि विभिन्न राज्यों से नेपाल घूमने या यात्रा पर गए करीब 288 भारतीयों से अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, इनमें से लगभग 200 लोग चीन के तिब्बत हिस्से में फंसे हुए हैं, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर और संशय से भरी बन गई है।
त्रिशूली प्रोजेक्ट से लेकर तीर्थयात्री तक, सूची में कई बड़े ग्रुप शामिल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हालिया ब्रीफिंग में बताया कि लापता लोगों में देश के अलग-अलग कोनों से पहुंचे पर्यटक और कामगार शामिल हैं। इनमें त्रिशूली 1 पावर प्रोजेक्ट पर कार्यरत 73 कर्मचारी, तमिलनाडु से अमरनाथ यात्रा के रास्ते पर निकले दो अलग-अलग ग्रुप (37 और 49 लोग), पश्चिम बंगाल और केरल के यात्री समूह शामिल हैं। इसके अलावा, ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और राहत दल लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अचानक आए इस सैलाब के बीच ये सभी नागरिक आखिर किस सुरक्षित स्थान पर अटके हुए हैं।
युद्धस्तर पर चल रहा रेस्क्यू, अब तक 21 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
इस खौफनाक आपदा के बाद भारत और नेपाल की सरकारें हरकत में आ गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाल नेतृत्व से बातचीत करने के बाद मानवीय सहायता तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई गई है। अब तक नेपाल पुलिस और राहत दलों ने मिलकर कुल 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जबकि रसुवा और भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में फंसे 800 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। तिब्बत सीमा के पास फंसे 200 भारतीयों ने भी मदद की गुहार लगाई है, जिनके लिए विशेष बचाव दल तैनात किए गए हैं।
क्यों आई यह अचानक बाढ़? ल्हेंदे नदी के रुकने से हुआ बड़ा धमाका
प्रशासनिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तबाही की मुख्य वजह भूस्खलन के चलते भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ‘ल्हेंदे’ के प्रवाह का अचानक अवरुद्ध होना था। पानी का बहाव रुकने से बने कृत्रिम बांध के टूटने से निचले इलाकों में पानी का सैलाब आ गया, जिसने नेपाल के रसुवागढ़ी, तिमुरे और आसपास के जिलों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, चितवन, नवलपरासी और धादिंग जैसे जिलों से सबसे ज्यादा शव बरामद हुए हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, तबाही का नया सच सामने आ रहा है, और सरकार की पूरी प्राथमिकता हर एक लापता भारतीय को सकुशल वापस लाने पर टिकी है।
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