विपक्षी एकजुटता का दावा करने वाले INDIA गठबंधन की नींव क्या वाकई इतनी कमजोर है कि एक ‘अहंकार’ इसे हिला सकता है? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक कथित ऑडियो और उनके ताजा बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। मामला राष्ट्रीय स्तर पर साथ दिखने वाली कांग्रेस और वामपंथी दलों (Left Front) के बीच केरल की अंदरूनी रंजिश का है, जो अब दिल्ली की बैठकों में खुलकर बाहर आ गया है। राहुल गांधी द्वारा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम के कद्दावर नेता पिनाराई विजयन को गले लगाने से साफ इनकार करने के बाद, गठबंधन के भीतर की कड़वाहट अब चौराहे पर आ चुकी है। इस एक बयान ने न सिर्फ वामपंथी नेताओं को आगबबूला कर दिया है, बल्कि विरोधी खेमे को भी गठबंधन की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाने का बड़ा मौका दे दिया है।
‘गले मिलने की राजनीति अपनी जेब में रखें…’ वृंदा करात का राहुल पर तीखा पलटवार
राहुल गांधी के इस रुख पर कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सीपीएम की वरिष्ठ और तेजतर्रार नेता वृंदा करात ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए बेहद कड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कम्युनिस्टों को अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसी के गले मिलने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी को अपनी ‘गले लगाने वाली राजनीति’ अपने पास ही रखनी चाहिए, क्योंकि वामपंथियों को गले मिलने वाले दिखावे से ज्यादा स्पष्ट राजनीतिक सोच की जरूरत है। वृंदा करात ने राहुल गांधी को मर्यादा याद दिलाते हुए कहा कि वह देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और इस नाते उन्हें पिनाराई विजयन जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं का सम्मान करना सीखना चाहिए। सीपीएम के अन्य नेताओं ने भी राहुल को घेरा है; पूर्व सांसद एम.ए. बेबी ने कहा कि किसी ने राहुल से विजयन को गले लगाने की भीख नहीं मांगी थी, लेकिन कम से कम राहुल को विजयन की गिरफ्तारी की मांग करना बंद करना चाहिए। वहीं सांसद जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे को सीधे गठबंधन की साख से जोड़ दिया है।
केरल की ‘चुनावी रंजिश’ बनी दिल्ली में गले की हड्डी, आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे सियासी ड्रामे की पटकथा दरअसल केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों और वहां की जमीन से जुड़ी है। केरल में कांग्रेस (UDF) और सीपीएम (LDF) दशकों से एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। हाल ही में हुए सियासी उलटफेर में कांग्रेस ने पिनाराई विजयन की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया है, जिससे दोनों दलों के बीच जमीनी स्तर पर तल्खी चरम पर है। 8 जून को हुई INDIA गठबंधन की एक अहम बैठक के दौरान राहुल गांधी का एक ऑडियो सामने आया, जिसने इस आग में घी का काम किया। ऑडियो में राहुल कहते सुनाई दे रहे हैं कि वह पिनाराई विजयन को गले नहीं लगा सकते क्योंकि केरल में उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी है। हालांकि, इस पर खुद पूर्व सीएम पिनाराई विजयन ने भी सधा हुआ तंज कसा है। विजयन ने कहा कि उनके और राहुल के बीच कभी गले मिलने की परंपरा रही ही नहीं है, वे सिर्फ हाथ मिलाते हैं। लेकिन राहुल का यह बयान उनकी संकीर्ण सोच और INDIA गठबंधन को लेकर उनके ढुलमुल रवैए को उजागर करता है। विजयन ने चुटकी लेते हुए राहुल को साल 2018 की वह घटना भी याद दिलाई जब राहुल ने संसद में पीएम नरेंद्र मोदी को जबरन गले लगा लिया था।
‘सिर्फ फोटो खिंचाने का गठबंधन…’ मौके का फायदा उठा भाजपा ने दागे तीखे बाण
INDIA गठबंधन के अंदर मचे इस घमासान को देखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को विपक्ष को घेरने का एक बड़ा हथियार मिल गया है। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘अवसरवादिता की राजनीति’ करार दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि यह कोई वैचारिक गठबंधन नहीं है, बल्कि सिर्फ अपनी सहूलियत के लिए बनाया गया एक ‘मजबूरी का ढांचा’ है। पूनावाला ने कहा कि INDIA ब्लॉक में सिर्फ आपसी विभाजन और महत्वाकांक्षाओं की लड़ाई है, देश के विकास के लिए इनके पास कोई विजन या मिशन नहीं है। यह गठबंधन केवल कागजों और कैमरों के सामने मुस्कुराने के लिए जिंदा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इन नेताओं के दिल कभी आपस में मिल ही नहीं सकते। भाजपा के इस हमले के बाद अब कांग्रेस बैकफुट पर है और गठबंधन के अन्य दल इस विवाद को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन दरार अब साफ नजर आने लगी है।
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