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पूर्व विधायक के बेटे ने पहले पत्नी के सीने में उतारी कौंधती हुई मौत, फिर खुद के सिर में मारी गोली; अंदर की वजह कर देगी हैरान!

फिरोजाबाद में पूर्व विधायक के बेटे और रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर ने उठाया आत्मघाती कदम। कैंसर पीड़ित पत्नी को गोली मारने के बाद खुद को भी उड़ाया। जानिए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी।

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फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद से एक ऐसा सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। शनिवार की शांत रात अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। यूपी पुलिस के एक सेवानिवृत्त सब-इनस्पेक्टर (SI), जो कि एक रसूखदार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, उन्होंने अपनी ही लाइसेंसी रिवॉल्वर से पहले अपनी जीवनसंगिनी को मौत के घाट उतारा और फिर पलक झपकते ही खुद की कनपटी पर बंदूक रखकर ट्रिगर दबा दिया। इस दोहरे खूनी खेल में पूर्व दरोगा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी जीवनसंगिनी ने अस्पताल के बिस्तर पर तड़पते हुए दम तोड़ दिया। मरने वाले शख्स कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि इलाके के पूर्व कांग्रेसी विधायक के बेटे थे। इस खौफनाक वारदात के बाद से सुभाष चौराहा इलाके के लोग गहरे सदमे में हैं और हर कोई इस बात को लेकर हैरान है कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि एक कानून के रखवाले ने कानून को हाथ में लेकर इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लिया।

एक रसूखदार राजनीतिक परिवार का दर्दनाक अंत: जानिए कौन थे मृतक राकेश यादव

शिकोहाबाद कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुभाष तिराहा (चौराहा) निवासी राकेश यादव (उम्र लगभग 60 वर्ष) उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। कुछ समय पहले ही वह सेवामुक्त (रिटायर) हुए थे। राकेश यादव का पारिवारिक और राजनीतिक इतिहास काफी मजबूत था; वह शिकोहाबाद विधानसभा सीट से साल 1980 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले पूर्व विधायक स्वर्गीय जगदीश सिंह यादव के सुपुत्र थे। खाकी वर्दी से रिटायरमेंट लेने के बाद राकेश यादव घर पर खाली बैठने के बजाय समाज में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और उन्होंने वकालत का पेशा चुनकर कोर्ट में प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। पूर्व विधायक के बेटे और पूर्व दरोगा होने के चलते इलाके में उनका काफी सम्मान था। शनिवार की रात को करीब 9:00 बजे जब आम तौर पर लोग खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे होते हैं, तभी उनके आलीशान मकान से अचानक एक के बाद एक दो राउंड फायरिंग की जोरदार आवाजें आईं। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के पड़ोसी सन्न रह गए। जब लोग भागकर उनके घर के भीतर दाखिल हुए, तो वहां का खौफनाक मंजर देखकर सबकी रूह कांप गई। कमरे के फर्श पर राकेश यादव और उनकी पत्नी चारों तरफ फैले खून के बीच बेसुध पड़े तड़प रहे थे।

डिप्रेशन, कानूनी मुकदमा और पत्नी का असाध्य कैंसर: किस मजबूरी ने बदला खूनी खेल में?

स्थानीय लोगों और पुलिस से मिली शुरुआती कड़ियों को जोड़ने पर इस भयानक आत्मघाती कदम के पीछे की जो वजह सामने आ रही है, वह बेहद दर्दनाक और मानसिक तनाव से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर राकेश यादव पिछले काफी समय से मानसिक अवसाद यानी गहरे डिप्रेशन के शिकार थे। उनकी धर्मपत्नी एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी ‘कैंसर’ से जूझ रही थीं। पत्नी की दिन-ब-दिन बिगड़ती हालत और इलाज की लंबी व थका देने वाली प्रक्रिया ने राकेश को अंदर से पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। वह अपनी हमसफर को पल-पल दर्द में तड़पते हुए नहीं देख पा रहे थे, जिसके कारण वह चौबीसों घंटे भारी तनाव में डूबे रहते थे। इसके अलावा, किस्मत का खेल देखिए कि पूर्व दरोगा पर कोई पुराना कानूनी मुकदमा भी चल रहा था। एक तरफ कानून का शिकंजा, दूसरी तरफ कोर्ट-कचहरी के चक्कर और सबसे बढ़कर घर में पत्नी की जानलेवा बीमारी—इन तीनों मोर्चों पर राकेश यादव खुद को बिल्कुल अकेला और लाचार महसूस कर रहे थे। इसी मानसिक उथल-पुथल और भयानक तनाव के आगे आखिरकार उन्होंने घुटने टेक दिए और इस जानलेवा उलझन से हमेशा के लिए मुक्त होने के लिए उन्होंने खौफनाक रास्ता चुन लिया।

अस्पताल की चौखट पर टूटी आखिरी सांस: चीख-पुकार के बीच छा गया मातम

जैसे ही पड़ोसियों ने कमरे के भीतर दोनों को लहूलुहान हालत में देखा, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना शिकोहाबाद कोतवाली पुलिस को दी। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल आनन-फानन में मौके पर पहुंचा। पुलिस कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बिना वक्त गंवाए शिकोहाबाद के संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने राकेश यादव की नब्ज टटोली और उन्हें मृत घोषित कर दिया, क्योंकि गोली उनके सिर के आर-पार हो चुकी थी। वहीं दूसरी तरफ, उनकी पत्नी की सांसें अभी चल रही थीं, लेकिन उनकी नाजुक और गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत फिरोजाबाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था; उपचार के दौरान भारी खून बह जाने के कारण उन्होंने भी हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। एक ही रात में हंसते-खेलते परिवार के दो सदस्यों की मौत की खबर जैसे ही रिश्तेदारों और शहर के लोगों को मिली, अस्पताल से लेकर मृतक के घर तक चीख-पुकार मच गई।

पुलिस महकमे में खलबली: वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में चल रही है गहन जांच

इस दोहरे हत्याकांड और आत्महत्या की खबर ने फिरोजाबाद पुलिस प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अनुज चौधरी समेत कई आला अधिकारी भारी पुलिस फोर्स और फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने कमरे से खून के नमूने, लाइसेंसी रिवॉल्वर और अन्य साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। एएसपी ग्रामीण अनुज चौधरी ने मीडिया को बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला अत्यधिक मानसिक तनाव और पत्नी की बीमारी से परेशान होकर उठाया गया कदम प्रतीत होता है, लेकिन पुलिस हर एक पहलू की गहराई से बारीकी के साथ जांच कर रही है। पड़ोसियों, परिजनों और वकालत के साथियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि क्या घटना के तुरंत पहले कोई नया विवाद हुआ था। पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई और इलाके में पसरे सन्नाटे के बीच यह घटना आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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