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राम मंदिर विवाद पर बोलते-बोलते अचानक क्यों चुप हो गए बृजभूषण, किसे कहा- ‘मुझे तो सिर्फ संभावना दिखती है…’

बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा और चौंकाने वाला बयान! बिहार एनकाउंटर और राम मंदिर दान विवाद पर खोले कई राज, उत्तर प्रदेश की राजनीति में मच सकता है बवाल।

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मऊ जिले के रतनपुरा बाजार में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया के सामने कई ऐसे बयान दिए हैं, जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर बृजभूषण ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि राम मंदिर दान विवाद को लेकर भी एक ऐसा सस्पेंस पैदा कर दिया है, जिसके अब कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

“अदालतों पर ताला लगा देना चाहिए” – बिहार एनकाउंटर पर फूटा गुस्सा

बिहार में हुए भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले पर बृजभूषण शरण सिंह ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अपराधियों को मारने या सजा देने की यह परंपरा देश के लिए सही नहीं है। पूर्व सांसद ने न्यायपालिका का समर्थन करते हुए सीधे शब्दों में कहा कि अगर इंसाफ करने और अंतिम फैसला सुनाने का अधिकार पुलिस को ही दे दिया गया है, तो फिर देश में न्यायालयों को बंद कर देना चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर पुलिसिया सिस्टम पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

“सत्ता पक्ष ने ही लीक की खबरें” – राम मंदिर विवाद पर बड़ा दावा

अयोध्या के राम मंदिर में दान की चोरी को लेकर चल रहे विवाद पर जब मीडिया ने बृजभूषण से सवाल किया, तो उन्होंने एक नया सस्पेंस खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इतनी बड़ी जानकारियां अपने आप नहीं आ सकतीं, जरूर सत्ता पक्ष के ही किसी अंदरूनी व्यक्ति ने उन्हें यह ‘मसाला’ दिया है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें भी यहाँ चोरी की कोई गुंजाइश लगती है, तो उन्होंने रहस्यमयी ढंग से कहा, “हमें तो यहाँ संभावना ही संभावना दिखाई देती है। महाराज, हमने तो आज तक वहाँ जाकर दर्शन भी नहीं किए। हम तो पहले दिन ही…” इतना कहते-कहते वह अचानक रुक गए और मुस्कुराकर रह गए। उनके इस अधूरे वाक्य ने कई नए सवालों को जन्म दे दिया है।

यूपी की राजनीति और मायावती के ‘ब्राह्मण कार्ड’ पर दो टूक

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भविष्य पर बात करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि अभी राज्य के हालात पूरी तरह साफ नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव होने से ठीक 4 से 6 महीने पहले ही यूपी की असली राजनीतिक तस्वीर सामने आएगी। जब उनसे उनकी खुद की तैयारियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे कोई मौसमी नेता नहीं हैं, बल्कि साल के 12 महीने और चौबीसों घंटे जनता के बीच रहकर चुनाव की तैयारी में जुटे रहते हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती द्वारा ब्राह्मण समाज को लुभाने की कोशिशों पर उन्होंने साफ कहा कि अब कोई भी ब्राह्मण बसपा की तरफ देखने वाला नहीं है। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर केवल एक शब्द बोलते हुए उन्होंने इसे बेहद “दुखद” करार दिया।

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