अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस मामले को लेकर दो वकीलों द्वारा दायर याचिका में तत्काल हस्तक्षेप और जांच के आदेश की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे नियमित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की बात कही है। कोर्ट के इस रुख के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और अब आगे की कानूनी दिशा पर सभी की नजरें टिकी हैं।
याचिकाकर्ताओं की मांग और कोर्ट का रुख
यह याचिका वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दान में अनियमितताएं हो सकती हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत FIR दर्ज कर CBI की निगरानी में विशेष जांच टीम (SIT) बनाई जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मामले को सोमवार को दोबारा मेंशन किया जाए, जिससे आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सके।
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पहले से जारी
इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर चुकी है। आरोपों में चढ़ावे की राशि में हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और दान से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके।
याचिका में उठाए गए बड़े मुद्दे और आगे की संभावना
याचिका में यह भी मांग की गई है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट और राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि दान की राशि और संपत्तियों की पारदर्शी ऑडिट व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड नष्ट करने या बदलने पर रोक लगाने की बात भी कही गई है। अब मामला सोमवार की सुनवाई पर टिका है, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि आगे जांच की दिशा क्या होगी। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
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