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एनकाउंटर महापंचायत में ‘दूसरा भरत तिवारी’ बनने की धमकी देने वाला वो पुलिसकर्मी कौन? भाई ने खोला ऐसा राज, उड़ गए सबके होश!

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले के बीच महापंचायत में खुद को बिहार पुलिस का जवान और चचेरा भाई बताने वाले आशीष तिवारी के दावों की खुली पोल।

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बिहार के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद से ही इलाके में माहौल गरमाया हुआ है। बुधवार को इसी सिलसिले में आयोजित महापंचायत के दौरान हजारों की भीड़ के सामने अचानक एक युवक मंच पर पहुंचता है और खुद को भरत तिवारी का चचेरा भाई घोषित कर देता है। आक्रामक और भावुक अंदाज में भाषण देते हुए इस युवक, जिसका नाम आशीष तिवारी बताया जा रहा है, ने सीधे प्रशासन को चुनौती दे डाली। उसने भरी सभा में दावा किया कि वह बिहार पुलिस में कार्यरत है और भरत को न्याय दिलाने के लिए आज ही से अपनी सरकारी नौकरी छोड़ रहा है। सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए उसने यहाँ तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो वह ‘दूसरा भरत तिवारी’ बनने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस नाटकीय घटनाक्रम ने वहाँ मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया, लेकिन असली ट्विस्ट सभा खत्म होने के बाद आया।

‘मैं तो इसे जानता तक नहीं’ – भरत के छोटे भाई के बयान से मचा हड़कंप

जैसे ही आशीष तिवारी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों के मन में उसकी असलियत जानने की उत्सुकता बढ़ गई। जब इस संबंध में भरत भूषण तिवारी के सगे परिजनों से बात की गई, तो आशीष के सभी दावों की हवा निकल गई। भरत के बड़े भाई ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि आशीष का उनके परिवार से कोई करीबी या खून का रिश्ता है। वहीं, छोटे भाई चंदन तिवारी ने तो और भी चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, “मैं इस लड़के को जानता तक नहीं हूँ, उसे जिंदगी में पहली बार मंच पर ही देखा है।” परिवार का कहना है कि वह शायद गांव का रहने वाला हो सकता है, लेकिन इस संवेदनशील समय पर परिवार का नाम लेकर खुद को सगा बताना पूरी तरह भ्रामक है।

बिहार पुलिस में नौकरी का दावा या सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट?

भाषण का सबसे विवादित हिस्सा आशीष का बिहार पुलिस में होने और नौकरी का त्याग करने का दावा था। सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी बेल्ट की नौकरी या प्रशासनिक पद से इस्तीफा देने की एक पूरी कानूनी और विभागीय प्रक्रिया होती है, जिसमें लिखित आवेदन देना अनिवार्य होता है। वर्तमान में पुलिस विभाग या किसी भी सरकारी इकाई की तरफ से आशीष तिवारी नाम के किसी सिपाही के इस्तीफे या उसकी नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वाकई वह पुलिस विभाग का हिस्सा है, या फिर इस बेहद संवेदनशील मामले की आड़ में केवल जनता की सहानुभूति और सस्ती लोकप्रियता बटोरने की कोशिश की जा रही थी?

न्याय की लड़ाई के बीच भ्रामक दावों से नाराज परिवार, पुलिस जांच पर टिकी नजरें

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भरत तिवारी का परिवार काफी आहत है। परिजनों का साफ कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच कराना और न्याय पाना है। वे नहीं चाहते कि कोई भी बाहरी व्यक्ति इस तरह के झूठे और उग्र बयान देकर मामले को भटकाए या पुलिस प्रशासन की जांच को प्रभावित करे। फिलहाल, इस रहस्यमयी युवक के दावों के पीछे की असलियत क्या है, वह सचमुच पुलिस में है या नहीं, और उसके इस ड्रामे के पीछे की असली मंशा क्या थी? इन सभी सुलगते सवालों के जवाब पुलिस प्रशासन और खुफिया विभागों की जांच के बाद ही साफ हो पाएंगे।

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