भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब न्यायिक जांच का दौर शुरू हो गया है। जांच आयोग के अध्यक्ष और पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज Vinod Kumar Sinha अपनी टीम के साथ बिलौटी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने घटना से जुड़े स्थानों का निरीक्षण किया और परिजनों से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना। इस दौरान कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। गांव में जांच टीम के पहुंचने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों की पहचान होगी। आयोग ने मौके पर पहुंचकर घटना की परिस्थितियों को समझने और उपलब्ध तथ्यों को एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मां की मांग- दोषियों को मिले कड़ी सजा
जांच के दौरान भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भावुक होते हुए अपने बेटे को न्याय दिलाने की मांग उठाई। उन्होंने आयोग के सामने कहा कि उनके बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। आशा देवी ने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर परिवार को संदेह है, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग दोहराई और कहा कि परिवार को तभी संतोष मिलेगा जब पूरे मामले की पारदर्शी जांच होगी। परिजनों का कहना है कि वे शुरुआत से ही निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और अब न्यायिक जांच से उन्हें उम्मीद जगी है।
SP की मुलाकात और निष्पक्ष जांच का भरोसा
घटना के कई दिन बाद भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज भी भरत तिवारी के घर पहुंचे और परिवार से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने करीब एक घंटे तक परिजनों की बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी। एसपी ने कहा कि उनका उद्देश्य परिवार की भावनाओं को समझना और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग सुनिश्चित करना है। हालांकि परिजनों ने इस दौरान भी अपनी पुरानी मांग दोहराई और कहा कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। परिवार ने पुलिसकर्मियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की गहराई से जांच करने की मांग रखी।
महापंचायत के बाद बढ़ा दबाव, आंदोलन की चेतावनी
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर क्षेत्र में जनभावनाएं लगातार मजबूत होती जा रही हैं। हाल ही में आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग जुटे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पंचायत में शामिल लोगों ने कहा कि भरत तिवारी जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे, उन पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। ग्रामीणों और समर्थकों ने चेतावनी दी कि यदि न्यायिक जांच के बाद भी उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। इस बीच बिहार सरकार की कैबिनेट ने न्यायिक जांच को मंजूरी देकर रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया है। अब पूरे मामले पर राज्यभर की नजर टिकी हुई है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
